MP कांग्रेस में बगावत! राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी-जीतू पटवारी पर साधा निशाना, इस्तीफा देकर मचाई हलचल

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MP कांग्रेस में बगावत! राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी-जीतू पटवारी पर साधा निशाना, इस्तीफा देकर मचाई हलचल
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इंदौर
 मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव ने कहा कि पार्टी में अब कार्यकर्ताओं की बात सुनने के बजाय सवाल पूछने वालों को नोटिस देकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।

राकेश सिंह यादव ने कहा कि वे पिछले 30 से 35 वर्षों से कांग्रेस में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करते रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग पदों पर संगठन की जिम्मेदारियां निभाईं लेकिन पहली बार उन्हें ऐसा माहौल देखने को मिला जहां अपनी बात रखने पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा की जीतू पटवारी प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाने के योग्य नहीं हैं और उनके नेतृत्व में संगठन लगातार कमजोर हुआ है।

टीवी डिबेट में जाने पर मिला नोटिस
यादव ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रदेश कांग्रेस की ओर से एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें नेताओं को टीवी डिबेट में शामिल नहीं होने और मीडिया के सामने बयान देने से मना किया गया था। साथ ही तीन दिन के मौन सत्याग्रह का निर्देश भी दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी ने मुख्यमंत्री और वीर भूमि न्यास से जुड़े कथित 500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया था तब उसके समर्थन में क्या सबूत पेश किए गए।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से सिर्फ इतना पूछा था कि जिन आरोपों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई उनके दस्तावेज कहां हैं। लेकिन जवाब देने के बजाय उन्हें कारण बताओ नोटिस भेज दिया गया कि उन्होंने टीवी डिबेट में हिस्सा क्यों लिया। यादव का कहना है कि अपनी बात रखना और सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है और कांग्रेस के संविधान में मीडिया के बहिष्कार जैसा कोई प्रावधान नहीं है।

वीर भूमि न्यास मामले में उठाए सवाल
राकेश सिंह यादव ने कहा कि वीर भूमि न्यास को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यह सरकारी ट्रस्ट है और सरकार की जमीन एक विभाग से दूसरे विभाग को दी गई है। कांग्रेस सरकारों के समय भी कई अस्पतालों, सामाजिक संस्थाओं और धार्मिक ट्रस्टों को रियायती दरों पर जमीन आवंटित की गई थी। ऐसे मामलों को भ्रष्टाचार या घोटाला बताना उचित नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिना दस्तावेजों के इतने बड़े आरोप लगाने से पार्टी खुद सवालों के घेरे में आ गई है। यदि वास्तव में सबूत होते तो उन्हें दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक किया जाता।

जीतू पटवारी और हरीश चौधरी पर लगाए गंभीर आरोप
राकेश सिंह यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर संगठन में मनमानी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संगठन सृजन अभियान के दौरान पैसों के आधार पर नियुक्तियां की गईं जिससे संगठन को नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के लिए भी जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी जिम्मेदार हैं। यादव ने हरीश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पंजाब में टिकट बेचे और जीतू पटवारी ने उनका बचाव किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चौधरी एक डिफेंडर वाहन लेकर आए और उसके बदले कई पदों का बंटवारा किया गया।

राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पार्टी में गलत लोगों को संरक्षण मिल रहा है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ऐसे लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनकी वजह से कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं की भी बात नहीं सुनी जा रही है।

नगरीय निकाय चुनाव को लेकर जताई चिंता
यादव ने कहा कि यदि संगठन की कार्यशैली में बदलाव नहीं हुआ तो आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की स्थिति और कमजोर हो सकती है। प्रदेश की 16 नगर निगमों में पार्टी किसी भी महापौर सीट पर मजबूत स्थिति में नजर नहीं आ रही है।

बीजेपी में जाने के सवाल पर क्या बोले?
बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर राकेश सिंह यादव ने साफ कहा कि फिलहाल उनकी किसी भी दल से कोई बातचीत नहीं हुई है। भविष्य में क्या होगा इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। यादव ने यह भी कहा कि यदि राजनीति का उद्देश्य जनता के बीच काम करना है तो वह आगे भी ऐसा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह न दलाली कर सकते हैं और न ही संगठन में पैसों के लेन-देन की राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं।

 

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