लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बदली अंशिता की जिंदगी, संघर्षों को मात देकर कॉलेज तक पहुंची बेटी

Editor
4 Min Read

भोपाल

मध्यप्रदेश सरकार की लाड़ली लक्ष्मी योजना बेटियों की शिक्षा, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य की राह मजबूत कर रही है। सागर जिले के सेक्टर पटोवा, परियोजना बंडा के आंगनवाड़ी केंद्र धबोली की बालिका अंशिता लोधी की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। बचपन में मां को खोने और पिता का साथ छूटने के बाद अंशिता का जीवन अनेक कठिनाइयों से घिर गया था। आर्थिक तंगी के बीच उसकी पढ़ाई और भविष्य को लेकर परिवार भी चिंतित था, लाड़ली लक्ष्मी योजना से मिले आर्थिक संबल ने अंशिता के सपनों को नई उड़ान दी। आज अंशिता कॉलेज में अध्ययन कर रही है और अपने बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है।

कठिन परिस्थितियों में बीता बचपन, शिक्षा के सामने थीं चुनौतियां

वर्ष 2006 में एक बेहद गरीब परिवार में जन्मी अंशिता ने बचपन से ही विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। अभी वह छोटी ही थी, तभी उसकी मां का निधन हो गया। कुछ समय बाद पिता ने भी उसका साथ छोड़ दिया। ऐसी स्थिति में अंशिता के नाना-नानी और मामा ने उसकी देखभाल की जिम्मेदारी संभाली। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार के सामने उसकी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य सुरक्षित करने की चुनौती थी। परिवार चाहता था कि अंशिता पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बने, लेकिन आर्थिक कठिनाइयां उसके सपनों के रास्ते में बाधा बन रही थीं।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की पहल से मिली नई राह

इसी दौरान क्षेत्र में लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत सर्वे का कार्य चल रहा था। सर्वे के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा को अंशिता और उसके परिवार की परिस्थितियों की जानकारी मिली। उन्होंने परिवार को बालिका के उज्ज्वल भविष्य के लिए शिक्षा के महत्व और शासन की योजनाओं के बारे में समझाया। गीता विश्वकर्मा ने आवश्यक दस्तावेज तैयार करवाने में सहयोग किया और अंशिता का आवेदन लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत करवाया।

हर शैक्षणिक पड़ाव पर मिला आर्थिक संबल

लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से अंशिता को स्कूली शिक्षा के विभिन्न चरणों में छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक सहायता मिली। कक्षा छठवीं में 6 हजार रुपये, कक्षा नौवीं में 4 हजार रुपये तथा कक्षा 11वीं और 12वीं में 6-6 हजार रुपये की छात्रवृत्ति ने उसकी पढ़ाई में सहयोग दिया। इस सहायता से परिवार को आर्थिक संबल मिला और अंशिता की शिक्षा निरंतर जारी रखने में मदद मिली।

योजना से मिली सहायता ने परिवार के मन में यह विश्वास मजबूत किया कि बेटी की शिक्षा आर्थिक बोझ नहीं, बल्कि उसके भविष्य में किया जाने वाला महत्वपूर्ण निवेश है। अंशिता ने भी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई के प्रति अपना संकल्प बनाए रखा और एक-एक पड़ाव पार करते हुए आगे बढ़ती रही।

किशोरावस्था में फिर आई चुनौती, लेकिन नहीं टूटा हौसला

बारहवीं कक्षा पूरी करने के बाद अंशिता की आगे की पढ़ाई को लेकर परिवार के सामने एक बार फिर चिंता खड़ी हुई। सीमित संसाधनों के कारण मामा उसकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित थे। ऐसे समय में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गीता विश्वकर्मा ने परिवार से संपर्क किया और उन्हें समझाया कि बेटी की शिक्षा रोकना उसके भविष्य के अवसरों को सीमित करना होगा। उन्होंने परिवार को आगे की पढ़ाई के महत्व से अवगत कराया और अंशिता को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया।

इस समझाइश का सकारात्मक असर हुआ। परिवार ने अंशिता की पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया और उसे कॉलेज में प्रवेश दिलाया। आज अंशिता कॉलेज में अध्ययनरत है और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ रही है।

 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live