वन और वन्य जीव केवल प्राकृतिक संपदा ही नहीं, अमूल्य विरासत भी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन्य प्राणी सप्ताह के समापन अवसर पर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, मोहली में वन और वन्य प्राणी संरक्षण के लिये वन कर्मियों के समर्पण को प्रदर्शित करती लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ को रिलीज किया। बांधवगढ़ के घने वन, बाघों की स्वच्छंद गतिविधियां और अनूठा प्राकृतिक सौंदर्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन प्रकृति की इस संपदा को सुरक्षित रखने के लिए जो वनकर्मी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम करते हैं, उनकी कहानियां अक्सर अनकही रह जाती हैं। इन्हीं पहलुओं को लघु फिल्म ‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ में दर्शाया गया है। समारोह में फिल्म का एक अंश भी प्रदर्शित किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास वन्य जीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वन और वन्य जीव केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत हैं। इनके संरक्षण के लिए समाज की भागीदारी और जागरूकता आवश्यक है।

नियमित गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा, वन्य जीवों के स्वास्थ्य की देखभाल और मानव-वन्य जीव संघर्ष की आशंकाओं पर नजर रखना भी इसकी अहम जिम्मेदारियां हैं। फिल्म वनों के इसी पक्ष से दर्शकों को परिचित कराएगी, जिसे सामान्य पर्यटक अक्सर नहीं देख पाते। लगभग 13 मिनट 13 सेकंड की यह फिल्म बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक सौंदर्य, गौरवशाली इतिहास, समृद्ध जैव विविधता और बाघों के जीवन के साथ वन्य जीव संरक्षण में जुटे वन अमले की भूमिका को दर्शाती है। बांधवगढ़ जैसे बाघ बहुल क्षेत्र में संरक्षण केवल वन्य जीवों की निगरानी तक सीमित नहीं है।

संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास

‘ए डे इन द लैंड ऑफ टाइगर्स’ का निर्माण ‘उड़न गिलहरी’ कंपनी ने किया है। फिल्म निर्माण में  ओजैर और  अमन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। फिल्म से बांधवगढ़ की खूबसूरती के साथ उन वनकर्मियों और मैदानी कार्यकर्ताओं के समर्पण को भी पहचान मिलेगी, जो कठिन परिस्थितियों में इस प्राकृतिक धरोहर की रक्षा कर रहे हैं।

228 अधिकारी-कर्मचारी संभाल रहे वन सुरक्षा की जिम्मेदारी

उमरिया जिला स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्य जीवों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए 228 अधिकारी-कर्मचारी दिन-रात तैनात हैं। इनमें क्षेत्र संचालक, उप संचालक, 5 सहायक वन संरक्षक, एक वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, 10 वन क्षेत्रपाल, 11 उप वन क्षेत्रपाल, 31 वनपाल और 155 वनरक्षक सहित हाथी, महावत दल एवं वाहन चालक शामिल हैं।

इनके साथ 101 स्थाईकर्मी, 37 टीपीएफ जवान और 583 ईडीसी श्रमिक भी वन सुरक्षा एवं संरक्षण कार्यों में योगदान दे रहे हैं। दुर्गम वन क्षेत्रों में गश्त, वन्यजीवों की निगरानी और आपात परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई कर यह अमला बांधवगढ़ की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में जुटा है। संरक्षण व्यवस्था के सुचारु संचालन में क्षेत्र संचालक कार्यालय की टीम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यहां 32 कर्मचारी प्रशासनिक, वित्तीय, अभिलेखीय और तकनीकी कार्यों के माध्यम से मैदानी अमले को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराते हैं।

 

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