बबुआ 12 बजे तक सोते, 5 बजे जिम जाते थे’, CM योगी का विपक्ष पर तीखा तंज

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लखनऊ

लखनऊ में नेशनल हैंडलूम डे के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 'बबुआ' कहकर तंज कसा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग जीवनभर बच्चे ही बने रहते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'बबुआ' भी यही करते थे. 12 बजे तक सोते थे. 2 बजे तक तैयार होते थे. 5 बजे जिम जाने का समय हो जाता था. और 7 बजे महफिल सज जाती थी. उनका कहना था कि इसके बाद देश दुनिया से संपर्क ही खत्म हो जाता था। 

मुख्यमंत्री योगी ने आगे कहा कि तभी दंगे होते थे और महीनों कर्फ्यू होता था. उन्होंने यह भी कहा कि जहां हर काम को वोट बैंक के रूप में देखने लग जाए, वहां गरीबों का भला नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने 2017 के पहले के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में बिजली नहीं थी और ठीक सड़कें नहीं थीं। 

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कानून व्यवस्था इतनी बदहाल थी कि न बेटी सुरक्षित थी, न व्यापारी और न हस्तशिल्प कारीगर सुरक्षित था. लखनऊ में दिए गए इस बयान में मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और गरीबों से जुड़े मुद्दों को उठाया। 

सीएम योगी का सपा पर निशाना
अपने संबोधन में CM योगी ने कहा, ‘MSME उत्पाद को हमने रजिस्ट्रेशन करने के साथ ही हर साल पांच लाख रुपये की सुरक्षा बीमा का कवर भी दिया है। अगर किसी के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है, तो उसे पांच लाख रुपये मिल जाएंगे। यह चिंता पहले भी होनी चाहिए थी। वे दिन-रात काम करते हैं तो केवल दीया की रोशनी में नहीं, चिमनी में नहीं, केरोसिन के धुएं में नहीं, बल्कि जलते हुए LED का बल्ब उनकी आंख की रोशनी को और गति दे सके। क्योंकि गति सिर्फ उसकी आंख की रोशनी को नहीं, बल्कि उसके हथकरघे के माध्यम से बनने वाले उत्पाद में अपनी विरासत को सम्मान देने का भी एक माध्यम बनता है। यह काम 2017 से पहले भी हो सकता था। लेकिन भाई-भतीजेवाद में पड़ी और डूबी हुई उस समय की सरकारों के पास फुर्सत कहां थी? फुर्सत के लिए भी समय चाहिए।’

अखिलेश यादव पर किया तीखा प्रहार
उन्होंने आगे कहा, 'कुछ लोग उन शब्दों से पीछा नहीं छुड़ा सकते जो उनके साथ जुड़ जाता है। कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। बबुआ भी यही करते थे, 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे और 5 बजते-बजते जिम जाने का समय हो जाता था, 7 बजे के बाद तो महफिल जम जाती थी। तब तो फिर देश और दुनिया से उनका संपर्क ही समाप्त हो जाता था। तो उत्तर प्रदेश के बारे में कहां से सोच पाते? इसी कारण दंगे होते थे और महीनों-महीनों कर्फ्यू रहता था। इंसेफेलाइटिस और डेंगू से मौतें होती थी। गरीब का बच्चा जिन बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ना, उन बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के बुरे हाल थे। न शिक्षक था, न भवन था, न ही बालक-बालिकाओं के लिए टॉयलेट था, न पेयजल के लिए व्यवस्था थी।'

सरकार की गिनाईं उपलब्धियां 
सीएम योगी ने आगे अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट हैं। पेयजल की व्यवस्था है। हर बच्चे को दो यूनिफॉर्म दी जा रही है। बैग, किताबें दी जा रही हैं। जूते-मौजे, स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आज बच्चे पढ़ाई में अच्छे निकल रहे हैं। किसी भी स्कूल में जाकर बच्चे से पाठ पढ़ने को कहिए, वे पढ़कर सुनाते हैं। यह देखकर खुशी होती है। यह तब होता है जब मुख्यमंत्री समय निकालकर जिले-जिले में जाए, मंत्रिगण जगह-जगह जाए। लेकिन इन लोगों की विकास में कोई रुचि ही नहीं थी। जो है उनमें खानदान में लूट-खसूट शुरू हो जाती थी, कौन कितना नोंच ले और कौन कितना लूट ले। ऐसे में उनसे क्या उम्मीद करते? महिलाओं की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा भी खुद ही बने हुए थे।

 

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