मई महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा से, बना दुर्लभ धार्मिक संयोग

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मई महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा से, बना दुर्लभ धार्मिक संयोग
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 आज से मई का महीना शुरू हो चुका है. ज्योतिषियों के मुताबिक, मई का महीना धार्मिक नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है. दरअसल, मई में एक अनोखा संयोग बन रहा है, जहां महीने की शुरुआत और समापन दोनों ही पूर्णिमा से होगा. ऐसे योग बहुत कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इस पूरे महीने को पूजा-पाठ, स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. इस दिन पूरे महीने श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा करें और मनोकामना पूर्ति के लिए उनके आगे तेल का दीपक भी जलाएं.

पूर्णिमा से होगी महीने की शुरुआत
मई की शुरुआत 1 तारीख को वैशाख पूर्णिमा से हो रही है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में बहुत पवित्र माना जाता है. इस दिन लोग सुबह स्नान करके पूजा करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं. मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है.

बुद्ध पूर्णिमा का खास महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और जल दान करना बहुत शुभ होता है. वहीं बौद्ध धर्म में यह तिथि इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था. इसलिए यह दिन आध्यात्म और साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है.

महीने का अंत भी होगा पूर्णिमा पर
दिलचस्प बात यह है कि मई का आखिरी दिन यानी 31 मई को भी पूर्णिमा तिथि पड़ेगी. यह ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी, जो अपने आप में बहुत विशेष मानी जाती है. अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.

अधिक पूर्णिमा क्यों मानी जाती है खास?
अधिकमास करीब ढाई से तीन साल में एक बार आता है और इस दौरान आने वाली पूर्णिमा को बहुत पुण्यदायक माना जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति मिलने की मान्यता है.

शास्त्रों में महत्व
धार्मिक ग्रंथों में इस पूर्णिमा को बहुत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से व्यक्ति को सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. इसे ‘सर्व सिद्धिदायिनी’ तिथि भी कहा जाता है.

इन कामों को करना रहेगा शुभ
इस पूरे महीने में खासतौर पर पूर्णिमा के दिन व्रत रखना, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना और सत्यनारायण कथा सुनना लाभकारी माना जा रहा है. इसके अलावा गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करके अन्न, कपड़े और धन का दान करना भी बहुत शुभ माना गया है.

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