व्यापारी हत्याकांड के आरोपियों का सिर क्यों मुंडवाया? कोर्ट ने पंचकूला पुलिस कमिश्नर से मांगा जवाब

Editor
3 Min Read

पंचकूला.

पिंजौर में चर्चित हत्या मामले के चार आरोपितों को नंगे पैर और मुंडे सिर के साथ सार्वजनिक रूप से बाजार में घुमाने के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। घटना के करीब एक माह बाद कालका अदालत ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

अदालत ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए इसे पंचकूला के सत्र न्यायाधीश के संज्ञान में लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पंचकूला के पुलिस आयुक्त (सीपी) को भी पूरे घटनाक्रम की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। मामला छह जून का है, जब पिंजौर में जितेश मनोचा हत्याकांड के चार आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद बाजार में पैदल घुमाया था। आरोपियों के सिर मुंडे हुए थे और उनके पैरों में चप्पल या जूते भी नहीं थे। यह परेड पिंजौर के व्यस्त बाजार से कराई गई थी, जिसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हुई थीं। घटना को लेकर मानवाधिकारों और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठे थे।

हिरासत में प्रताड़ना के आरोप भी जांच के दायरे में
आठ जून को हुई सुनवाई के दौरान आरोपी रोहित मेहता की ओर से अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने अदालत में पक्ष रखा कि आरोपितों को पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया। अदालत के समक्ष मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि आरोपियों के शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए हैं। रिपोर्ट में विभिन्न हिस्सों में चोटें दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया। इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि हिरासत में प्रताड़ना और सार्वजनिक परेड की घटनाएं आपस में जुड़ी हैं तो उनकी संयुक्त जांच की जाए, अन्यथा दोनों मामलों की अलग-अलग जांच कराई जाए। अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदारी तय की जाए।

हत्या के बाद हुई थी कार्रवाई
पुलिस ने छह जून को जितेश मनोचा हत्याकांड में चार आरोपित मनप्रीत सिंह उर्फ मणि, रोहित मेहता उर्फ विक्की, मनीष कुमार और खुशदीप सिंह उर्फ दीपी को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद इन्हें पिंजौर बाजार में पैदल ले जाया गया था। इसी कार्रवाई को लेकर अब न्यायिक स्तर पर सवाल उठे हैं। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब सभी की नजरें पुलिस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सार्वजनिक परेड और हिरासत के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप थी या नहीं। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live