जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं, हमें ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ चाहिए: सीएम योगी

Editor
7 Min Read

लखनऊ
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गायत्री परिवार की प्रतियोगिता में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े। आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है। हम बिखरा-बंटा, जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं चाहते। ऐसा सोचने वाले पूर्वजों के प्रति श्रद्धा नहीं रखते हैं। हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ चाहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी हम सबको ऐसे भारत के लिए कार्य करने के लिए कहा है।

मुख्यमंत्री रविवार को राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने मां गायत्री, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य व माता भगवती देवी के चित्रों के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सीएम ने स्मारिका का विमोचन और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को पुरस्कृत भी किया।

गायत्री परिवार ने यज्ञों की वेदी पर साथ बैठाकर सर्वसमाज को जोड़ा
सीएम ने कहा कि गायत्री परिवार के पास ड़ॉ. प्रणव पंड्या का मार्गदर्शन और डॉ. चिन्मय पंडया जैसे दूरदर्शी नायक हैं। इसलिए परिवार को अगले 100 वर्ष के लिए लक्ष्य तय करना है। गायत्री परिवार को तनावग्रस्त, संघर्ष में उलझी, अस्तित्व के जूझती मानवता के जीवन में नया उजाला लाना है। जब देश पराधीन था और व्यक्ति हताश-निराश था, लोगों को लगता था कि गुलामी नियति बन चुकी है। तब ब्रजभूमि आगरा में जन्म लेकर भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों व परंपरा के प्रति अगाध निष्ठा रखने वाले एक ऋषि का प्रादुर्भाव होता है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मथुरा में प्रारंभिक साधना को बढ़ाते हुए हरिद्वार में जिस गायत्री परिवार की स्थापना की, उसने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

तीन साल में तीन संस्थाएं, सबका लक्ष्य एक
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों के रास्ते, स्थान भले अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक है। तीनों संगठनों ने समाज की सुप्त चेतना को जागृत किया और उन्हें सनातन मूल्यों के साथ जोड़ा। भारत-भारतीयता का अहसास करके युवाओं को देश की आजादी के लिए कार्य करने को प्रेरित किया।

आजादी के आंदोलन से जुड़े आचार्य जी
सीएम ने कहा कि पं. श्रीराम शर्मा स्वाधीनता संग्राम सेनानी के रूप में आजादी के आंदोलन से जुड़े रहे। आजादी के आंदोलन से जुड़े अनेक ऋषियों ने इसमें सक्रिय योगदान दिया, लेकिन उन्हें लगा कि सफलता के लिए भौतिक ताकत के साथ आध्यात्मिक शक्ति की भी आवश्यकता है, तो साधना के माध्यम से उसे आगे बढ़ाया।

विचार पर चलने वाला संगठन तय करता है लंबी दूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित सृष्टि का पहला मंत्र ‘गायत्री मंत्र’ परमपिता के तेज से जोड़ने का आह्वान करता है। जिसने भी इसकी शक्ति को अंगीकार किया, उसका कल्याण हो गया। पं. श्रीराम शर्मा जी इस संगठन को अपना नाम दे सकते थे, लेकिन उनका मानना था कि व्यक्ति से बड़ा परिवार होता है। इसलिए इसे गायत्री परिवार नाम दिया। व्यक्ति के नाम पर चलने वाला संगठन कुछ वर्षों के बाद धराशायी हो जाता है, लेकिन विचार के नाम पर चलने वाला संगठन लंबी दूरी तय करता है। 100 वर्ष की यह साधना इसका प्रमाण है। शब्द ब्रह्म है, विचार कभी नहीं मरते, इसी का प्रतीक है अखिल विश्व गायत्री परिवार।

संकट का मिलकर सामना करता था संयुक्त परिवार
सीएम ने कहा कि यज्ञों की वेदी पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से समाज को जोड़ने का काम पवित्र है। पहले संसाधन कम थे, लेकिन परिवार हमारी ताकत था। सभी भाई-उनके बच्चे संयुक्त परिवार की परंपरा में रहते थे। हर कोई मिलकर संकट का सामना करता था। आज परिवार सीमित हो गए। छत भले एक हो, लेकिन पांच परिवारों के मुख अलग-अलग दिशा में हैं। गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं के कारण अवश्य स्थिति कुछ संतोषजनक है। दुनिया में बिखर रहे समाज और तबाह हो रहे परिवारों को बचाने के लिए मंत्रालय गठित करना पड़ा। एक मंत्री देख रहा है कि तनाव से बचने के लिए क्या करना है।

बिखराव रोकने का दायित्व उठाए गायत्री परिवार
मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार की सराहना करते हुए कहा कि इस परिवार की वजह से आज हर बच्चा गायत्री मंत्र सुना देता है। तुतलाती भाषा में बच्चों के मुख से गायत्री मंत्र सुनकर बहुत अच्छा लगता है। समाज में बिखराव को रोकने का दायित्व भी गायत्री परिवार को उठाना पड़ेगा। पं. श्रीराम शर्मा उन महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ा। धर्म और विज्ञान एक दूसरे के सहयोगी हैं। डॉ. चिन्मय पंड्या भी मॉडर्न मेडिसिन के चिकित्सक हैं, लेकिन अखिल विश्व गायत्री परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं।

समाज की चेतना व युगनिर्माता हैं शिक्षक
सीएम ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युगनिर्माता बताया। कहा कि जब शिक्षक जागृत होता है और ईमानदारी से दायित्वों का निर्वहन करता है तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगती। जब दुनिया अज्ञानता के अंधकार में थी, तब भारत में श्रेष्ठ आचार्यों की परंपरा ने तक्षशिला व नालंदा जैसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय दिए। गुरुकुल व ऋषि परंपरा का नाम लेकर सीएम ने महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदिपनी-श्रीकृष्ण, चाणक्य-चंद्रगुप्त का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा को फिर से जीवित करने की आवश्यकता है

बांटने की प्रवृत्ति भारत माता व पूर्वजों के प्रति अपराध
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलामी के दौर में एक तबका समाज को विभाजित तो एक तबका समाज को जोड़ रहा था। बांटने वाले स्वाधीनता का विरोध करते थे और समाज को विभाजित करते थे। आज भी बांटने वाले तत्व क्षेत्र, जाति, भाषा के नाम पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live