एटक और आंगनबाड़ी बहनों की जीत-विभा

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एटक और आंगनबाड़ी बहनों की जीत-विभा

बिलासपुर
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 15 सौ रुपए प्रति माह तथा सहायिकाओ का मानदेय मे 750 रुपए की कटौती कर दी गई थी । इसी कटौति के ख़िलाफ़ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक की प्रांतीय महामंत्री जो स्वयं एक कार्यकर्ता है ने 2019 में मध्य प्रदेश सरकार के फैसले को उच्च न्यायालय जबलपुर में चुनौती दी न्यायालय मे पैरवी बरिष्ट अधिवक्ता अरविन्द श्रीवास्तव ने किया था । 

3 फरवरी 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 48 माह का एरियर्स 1 लाख 20 हजार रूपए प्रति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं 63 हजार रुपए 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करे। लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने उच्च न्यायालय के डबल बेंच के समक्ष अपील की । 8 जुलाई 2026  को उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने सरकार की अपील को ख़ारिज कर दिया।  और एरियर्स भुगतान को यथावत रखा गया है।फ़ैसला आने के बाद याचिकाकर्ता एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका यूनियन एटक की महासचिव विभा पांडेय ने भावुक होकर कहा कि 2019 में मध्य प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ पहली बार याचिका लगाई तो हज़ारों कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का समर्थन एवं आशीर्वाद हमारे साथ था अरविन्द श्रीवास्तव बरिष्ट अधिवक्ता उच्च न्यायालय जबलपुर ने प्रकरण को अध्ययन कर कहा कि ज़रूर हम जीतेंगे और वही हुआ।

विभा पांडेय ने कहा कि ग्रेच्युटी का केस भी हम जीत गये हैं और मानदेय 26 हजार रुपए प्रति माह करने का केस भी जीतेंगे और सभी बहनों का समर्थन , सहयोग और आशीर्वाद मिलता रहा तो हम बहनों को एक सरकारी कर्मचारी का दर्जा भी दिला कर रहेंगे ।

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