कन्नौज में 50 साल पुराने भू-सीलिंग विवाद का फैसला, 67 एकड़ जमीन सरकारी घोषित

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कन्नौज में 50 साल पुराने भू-सीलिंग विवाद का फैसला, 67 एकड़ जमीन सरकारी घोषित
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कन्नौज
यूपी के कन्नौज में 50 साल पुराने भू-सीलिंग विवाद में अपर आयुक्त न्यायालय ने अंतिम आदेश जारी करते हुए तिर्वा रियासत की 67.29 एकड़ भूमि सरकारी घोषित कर दी है। उप्र अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 के तहत अपर आयुक्त प्रशासन रेनू सिंह ने राजा शारदा नरायण सिंह के वारिसों की अपील पर यह फैसला दिया। उन्होंने कुल 112.60 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को अंतिम रूप से सीलिंग के तहत अतिरिक्त यानी सरप्लस घोषित किया है। 17.31 एकड़ भूमि को आबादी और बाग की श्रेणी में होने के कारण सीलिंग से अवमुक्त कर दिया गया है।

राज्य सरकार का पक्ष रख रहे शासकीय अधिवक्ता कानपुर मंडल नीरज सिंह सेंगर के मुताबिक तिर्वा रियासत की कन्नौज एवं फर्रुखाबाद के कई गांवों में जमीन थी। जिसको लेकर न्यायालयों में वाद दायर था। जिसमें राजा शारदा नरायण सिंह की 44 एकड़ भूमि सीलिंग में घोषित की गई थी। जिसके विरुद्ध रियासत ने न्यायालय में वाद दायर किया था। जिस पर प्रशासन द्वारा जमीनों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। तिर्वा खास की भूमि को लेकर उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की 37 एकड़ भूमि को रियासत ने छोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया था। 1 जून को अपर आयुक्त कानपुर मंडल ने निर्णय लेते हुए कहा कि राजा शारदा नरायण सिंह की 112 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को सीलिंग में घोषित किया जाता है।

एसडीएम की जांच में खुला खेल
उच्च न्यायालय ने 27 जून 2023 को साल 1994 के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए अपर आयुक्त को निर्देश दिया था कि सभी पक्षों को दोबारा सुनकर छह महीने के भीतर मामले का अंतिम निस्तारण करें। इस आदेश के अनुपालन में अदालत ने एसडीएम तिर्वा से रिपोर्ट मांगी। जिसमें खुलासा हुआ कि सीलिंग का मुकदमा लंबित रहने और क्रय-विक्रय पर रोक होने के बावजूद खातेदारों द्वारा जमीनों की लगातार खरीद-फरोख्त की गई। जमीन पर कोल्ड स्टोरेज बना लिया गया। सड़कें निकाल दी गई और बड़े हिस्से पर मकान बनाकर आबादी बसा दी गई।

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