नई दिल्ली
अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध तेज हो गया है. जून में हुए युद्धविराम और समझौते के बाद बनी शांति अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है. अमेरिका ने लगातार तीन रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जबकि जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है. इसके साथ ही खाड़ी के कई देशों में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, 11 जुलाई को ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, नौसैनिक ठिकाने, हथियार भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया.
CENTCOM का दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर पिछले तीन दिनों में कुल 300 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को तबाह किया गया है. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Galaxy पर हुए ईरानी हमले के जवाब में की गई.
IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को किया बंद
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट को "अगले आदेश तक" बंद करने का ऐलान कर दिया. ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका क्षेत्र में दखल देना बंद नहीं करता, तब तक इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर उसकी शर्तें लागू रहेंगी. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट केवल "ईरान की व्यवस्था" के तहत ही खुलेगा, किसी अमेरिकी दबाव में नहीं.
इस बीच संघर्ष खाड़ी के दूसरे देशों तक भी फैल गया है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बताया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही मार गिराया. बहरीन में दूसरी बार पूरे देश में सायरन बजाए गए. कुवैत ने भी रॉकेट और ड्रोन हमलों को रोकने की पुष्टि की, जबकि कतर ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जारी करने के बाद खतरा टलने की जानकारी दी.
ब्रेंट क्रूड की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंची
इस पूरी घटना का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होती है. संघर्ष बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 79 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज लंबे समय तक बंद रहा तो तेल और गैस की कीमतों में बड़ी तेजी आ सकती है.
भारत के लिए भी यह संकट चिंता का विषय है. भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है. हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में होर्मुज पर निर्भरता कम की है, लेकिन रसोई गैस (LPG) के मामले में स्थिति अलग है. भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और उसमें से करीब 90 प्रतिशत सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आती है. ऐसे में यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर असर पड़ सकता है.
अरब मुल्कों में ईरान के हमले
इसके अलावा खाड़ी के छह देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं. इनमें बड़ी संख्या कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत में है, जहां हाल के दिनों में मिसाइल हमलों और एयर डिफेंस अलर्ट की घटनाएं सामने आई हैं. संघर्ष के दौरान अब तक कई भारतीयों की मौत की खबरें भी आई हैं. भारत सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों तथा नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है.
कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है. इसका असर पूरे मध्य पूर्व, वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो दुनिया को तेल संकट, महंगाई और क्षेत्रीय अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है.
