भोपाल में खाने में कीड़े और मरी हुई छिपकली मिलने से हड़कंप, स्कूल-कॉलेजों की मेस पर FDA की सख्ती

Editor
4 Min Read

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और खान-पान की गुणवत्ता को लेकर जिला प्रशासन और खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। अक्टूबर महीने में शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टलों से सामने आई भोजन में कीड़े और मरी हुई छिपकली मिलने की दो गंभीर घटनाओं के बाद, शहरभर के स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों की मेस व कैंटीनों की व्यापक जांच के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस अभियान को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए छह खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की दो विशेष टीमें बनाई हैं।

शिकायत मिलने पर कार्रवाई
यह पूरा प्रशासनिक एक्शन हाल ही में हुई दो बड़ी घटनाओं के बाद उठाया गया है। पहला मामला पंचशील नगर स्थित अनुसूचित जाति कन्या कॉलेज के हॉस्टल का था, जहां अक्टूबर में परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने पर जमकर हंगामा हुआ था। वहीं, दूसरी और अधिक गंभीर घटना मुगालिया छाप स्थित श्रमोदय आवासीय विद्यालय के बॉयज हॉस्टल में सामने आई थी, जहां छात्रों को परोसी गई आलू की सब्जी में मरी हुई छिपकली निकल आई थी। इस दूषित भोजन के सेवन से करीब 13 विद्यार्थियों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इन घटनाओं के बाद कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सख्त रुख अपनाते हुए 12 अक्टूबर को खाद्य सुरक्षा की जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक बुलाई थी और शिक्षण संस्थानों की कैंटीन-मेस की सघन जांच के निर्देश दिए थे।

छह अधिकारियों की दो विशेष टीमें गठित
जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने छह अधिकारियों को दो अलग-अलग टीमों में बांटा है:

    पहली टीम: इसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी तवंशी, वर्षा व्यास और अर्चना प्रमाकर को शामिल किया गया है।

    दूसरी टीम: इस टीम की जिम्मेदारी जगदीश विश्वकर्मा, साधना सक्सेना और पूजा शाक्य को सौंपी गई है।

ये दोनों टीमें स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में संचालित भोजनालयों, कैंटीनों और मेस की औचक जांच कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान केवल तैयार भोजन ही नहीं, बल्कि कच्ची और पक्की खाद्य सामग्री के भंडारण के तरीकों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खाने-पीने की चीजों को चूहों, कीटों और अन्य संभावित संदूषण से बचाने के लिए पुख्ता इंतजाम हैं या नहीं।

लैब में भेजे जाएंगे सैंपल
निरीक्षण टीमों का मुख्य फोकस विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले भोजन की ताजगी, उसकी गुणवत्ता और सुरक्षित वितरण व्यवस्था का आकलन करना है। इसके साथ ही, विभाग द्वारा तैयार और परोसे जाने वाले भोजन के नमूने भी एकत्र किए जा रहे हैं, जिन्हें परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के दौरान यदि खाद्य सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कमी पाई जाती है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उसके नियमों के तहत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान का दायरा स्कूल-कॉलेजों के साथ-साथ सभी आवासीय परिसरों और हॉस्टलों की मेस तक विस्तृत किया गया है ताकि छात्रों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले ऑपरेटरों पर नकेल कसी जा सके।

 

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live