जिम्बाब्वे क्रिकेट में कोहराम, स्कॉर्पियन ने 822 रन ठोककर रचा इतिहास

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नई दिल्ली

क्रिकेट में 300 रन कभी मैच जिताने वाला स्कोर माना जाता था. 400 पार पहुंचना आज भी बड़ी बात समझी जाती है. लेकिन जिम्बाब्वे की घरेलू क्रिकेट में जो हुआ, उसने सारे पैमाने ही तोड़ दिए.

2025-26 मसविंगो 50 ओवर फर्स्ट लीग में खेले गए मुकाबले में स्कॉर्पियन क्रिकेट क्लब ने 50 ओवरों में 822 रन ठोक डाले… और कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.सामने वाली टीम मेथेन लॉयन्स सिर्फ 28 रनों पर सिमट गई. नतीजा? स्कॉर्पियन ने मैच 794 रनों से जीत लिया.

अगर यह आधिकारिक लिस्ट-ए मुकाबला होता, तो क्रिकेट इतिहास की किताबें दोबारा लिखनी पड़तीं.

दरअसल, अगर यह आधिकारिक लिस्ट-ए मैच होता, तो क्रिकेट इतिहास का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बन जाता. हालांकि मेथेन लॉयन्स के गेंदबाजों के लिए राहत की बात यही रही कि इस मुकाबले को आधिकारिक लिस्ट-ए दर्जा हासिल नहीं था.

ऐसा स्कोरकार्ड जिसे देखकर आंखें फटी रह जाएं …
टॉस जीतकर स्कॉर्पियन के कप्तान प्रेज मकाजा ने बल्लेबाजी चुनी और फिर मैदान पर रन नहीं, तूफान बरसा.

ओपनर विल्फ्रेड माटेंडे और ताकुंडा माडेम्बो ने शुरुआत से ही गेंदबाजों को निशाने पर ले लिया. चौकों-छक्कों की ऐसी बारिश हुई कि 21.3 ओवरों तक टीम का पहला विकेट गिरा, तब तक माटेंडे दोहरा शतक पूरा कर चुके थे.

उन्होंने सिर्फ 75 गेंदों में 203 रन ठोक दिए, जिसमें 23 चौके और 13 छक्के शामिल थे.

लेकिन राहत की सांस लेने का मौका लॉयन्स के गेंदबाजों को तब भी नहीं मिला.

एक ने डबल सेंचुरी मारी… दूसरे ने ठोक दी ट्रिपल सेंचुरी
दूसरे छोर पर ताकुंडा माडेम्बो लगातार तबाही मचाते रहे. जहां आम वनडे मैचों में 300 रन टीम का सुरक्षित स्कोर माना जाता है, वहां माडेम्बो अकेले ही 300 पार निकल गए.

रिटायर्ड आउट होने से पहले उन्होंने 143 गेंदों में 302 रन बनाए. उनकी पारी में 50 चौके और 7 छक्के शामिल थे. यानी लगभग हर दूसरी गेंद बाउंड्री की तरफ जा रही थी.

इसके बाद विन्सेंट मोयो ने 39 गेंदों में 78 रन उड़ाए, जबकि गैब्रियल जाया ने सिर्फ 49 गेंदों में नाबाद 110 रन ठोक दिए.

कप्तान मकाजा जरूर इस ‘रन महोत्सव’ में ज्यादा योगदान नहीं दे सके और 5 गेंदों में सिर्फ 2 रन बना पाए.

गेंदबाज नहीं… ‘एक्स्ट्रा’ भी बन गए विलेन
स्कॉर्पियन के बल्लेबाजों ने जितना कहर बरपाया, मेथेन लायंस के गेंदबाजों ने भी उतनी ही मदद कर दी.

टीम ने कुल 108 एक्स्ट्रा दे डाले, जिसमें 79 वाइड और 23 नो-बॉल शामिल थीं.
हालत ऐसी रही कि हर गेंदबाज ने 100 से ज्यादा रन लुटाए. सबसे ‘किफायती’ गेंदबाज सिडनी शुम्बा रहे, जिनकी इकॉनमी भी 13.3 रन प्रति ओवर रही.

पहली पारी में बल्लेबाजों का स्वर्ग… दूसरी में गेंदबाजों का जादू!
पहली पारी देखकर लग रहा था कि पिच बल्लेबाजों के लिए किसी वीडियो गेम जैसी है. लेकिन दूसरी पारी शुरू होते ही कहानी पलट गई.

मेथेन लॉयन्स की टीम सिर्फ 28/7 (7.5 ओवरों में) तक पहुंच पाई और मुकाबला वहीं रोका गया. मेथेन लॉयन्स 794 रनों से हार गई. क्रिकेट इतिहास में इतने बड़े अंतर से हार शायद ही कभी देखने को मिली हो.

भारत का रिकॉर्ड भी चर्चा में
फिलहाल आधिकारिक लिस्ट-ए क्रिकेट में सबसे बड़ा टीम स्कोर बिहार के नाम है, जिसने विजय हजारे ट्रॉफी में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ 574 रन बनाए थे. उसी मैच में वैभव सूर्यवंशी ने 84 गेंदों में 190 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी.

लेकिन जिम्बाब्वे के इस मैच ने दिखा दिया कि क्रिकेट में ‘असंभव’ जैसा शब्द शायद अब बचा ही नहीं है.
 

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