सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें विश्वविद्यालय : मंत्री परमार

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सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें विश्वविद्यालय : मंत्री  परमार
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भोपाल 

विद्यार्थियों का सर्वांगीण हित, हमारी प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को सरलता और सुलभता से सुविधाएं उपलब्ध हो, इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। समस्त विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों की अंकसूची, उपाधि एवं अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित, प्रमाणित एवं सरल डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन कराते हुए उन्हें उपलब्ध पाठ्यक्रमों में रुचि एवं आवश्यकता अनुसार चयन के लिए प्रेरित कर, शैक्षणिक उन्नयन से जोड़ा जाए। विश्वविद्यालयों के कार्यों का प्रभाव, सामाजिक परिवर्तन की अभिप्रेरणा बने। विश्वविद्यालय, सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में, (एनएडी-डिजिलॉकर) एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री  परमार ने एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के क्रियान्वयन में, देश भर में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया एवं देश भर में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

उच्च शिक्षा मंत्री  परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के यशस्वी नेतृत्व में, हमारा प्रदेश उच्च शिक्षा को आधुनिक, नवाचारयुक्त, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य हर विद्यार्थी तक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में, यह एक महत्वपूर्ण पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक केवल सुविधा का ही माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त आधार है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी डिजिटल रूप से सक्षम, ज्ञानसम्पन्न एवं वैश्विक अवसरों के लिए तैयार बने। विश्वविद्यालयों में परीक्षा एवं परिणाम को पारदर्शितापूर्ण बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। डिजिटल मूल्यांकन पद्धति से परीक्षा एवं परिणाम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

मंत्री  परमार ने कहा कि विद्यार्थी को संवेदनशील एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाना, विश्वविद्यालयों का दायित्व है। इसके लिए राष्ट्रहित एवं समाज हित में संस्कार रोपित करने की आवश्यकता हैं। मंत्री  परमार ने कहा कि शिक्षकों के आचरण को विद्यार्थी आत्मसात करते हैं, इसलिए शिक्षण व्यावहारिक होना चाहिए। मंत्री  परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए, भारतीय दृष्टि के साथ शैक्षणिक परिदृश्य सृजन करना होगा।

मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षण, डिजिटल गवर्नेंस एवं गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना, हमारी प्राथमिकताओं में समाहित है। एनएडी-डिजिलॉकर के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज सुरक्षित, प्रमाणित एवं डिजिटल रूप में सहज उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। एनएडी-डिजिलॉकर, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ बना रहा है। वहीं (स्वयं) पोर्टल, युवाओं को देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं संस्थानों से ऑनलाइन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, छात्र हित को प्राथमिकता देते हुए एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।  राजन ने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाते हुए समस्त विद्यार्थियों का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन एवं परीक्षा में प्रतिभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, अकादमिक कैलेंडर का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हों।  राजन ने विश्वविद्यालयों को पारदर्शितापूर्ण प्रशासनिक प्रबंधन के लिए, समर्थ पोर्टल पर शिफ्ट करने के लिए भी प्रेरित किया।

उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन देते हुए मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन प्रो खेमसिंह डेहरिया ने, कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विषयविद सु दीक्षा राजपूत संयुक्त सचिव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली एवं  अभिनव शर्मा क्षेत्रीय समन्वयक एनएडी-डिजिलॉकर ने, कार्यशाला की प्रासंगिकता, आवश्यकता एवं महत्ता के आलोक में अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयविद एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत संवाद करेंगे और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे।

कार्यशाला में आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रशासनिक सदस्य  महेशचंद चौधरी एवं आयोग के सचिव डॉ देवेंद्र सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे। 

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