मरीजों की बीमारी पर ‘कमीशनखोरी’ का इलाज!

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मरीजों की बीमारी पर ‘कमीशनखोरी’ का इलाज!

राजपुर अस्पताल के तीन डॉक्टर लोकायुक्त के शिकंजे में, पैथोलॉजी जांच को बना रखा था ‘कमाई का धंधा’

 बड़वानी
सरकारी अस्पताल, जहां मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अगर डॉक्टर बीमारी नहीं बल्कि “कमीशन” देखने लगें, तो व्यवस्था पर सवाल उठना तय है। ऐसा ही शर्मनाक मामला राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सामने आया, जहां तीन डॉक्टर मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब पर भेजने के एवज में मोटा कमीशन वसूलते पकड़े गए।

विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन की इंदौर इकाई ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तीनों डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि अस्पताल में लंबे समय से “जांच के नाम पर कमीशन” का खेल चल रहा था और मरीजों को सिर्फ इसलिए एक विशेष लैब पर भेजा जा रहा था ताकि डॉक्टरों की जेब गर्म होती रहे।

शिकायतकर्ता अदनान अली, जो राजपुर की एक पैथोलॉजी लैब में मैनेजर है, ने लोकायुक्त को बताया कि पहले डॉक्टर 20 प्रतिशत कमीशन लेते थे, लेकिन पिछले महीने से लालच इतना बढ़ गया कि तीनों ने मिलकर सीधे 50 प्रतिशत हिस्सा मांगना शुरू कर दिया। यानी मरीजों की जेब कटे और डॉक्टरों की कमाई बढ़े — यही खेल चल रहा था।
लोकायुक्त जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप बिछाया गया। कार्रवाई के दौरान आरोपी डॉक्टरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया गया।
डॉ. अमित शाक्य — 8 हजार रुपए
डॉ. दिव्या साईं — 5 हजार रुपए
डॉ. मनोहर गोदारा — 12 हजार रुपए

लोकायुक्त टीम ने कुल 25 हजार रुपए की रिश्वत राशि बरामद की। तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज अब “कमीशन आधारित व्यवस्था” बन चुका है? और यदि लोकायुक्त की कार्रवाई नहीं होती, तो यह खेल आखिर कब तक चलता रहता?
सूत्रों की मानें तो अब इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो सकती है। राजपुर अस्पताल में हुई इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

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