कलयुग का सच या प्रतीक? पुराणों में क्या कहा गया है

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कलयुग का सच या प्रतीक? पुराणों में क्या कहा गया है
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हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथ जैसे गरुड़ पुराण, विष्णु पुराण और अग्नि पुराण में कलयुग का विस्तार से वर्णन मिलता है. इन ग्रंथों में बताया गया है कि चार युग- सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग, में कलयुग सबसे छोटा लेकिन सबसे भयंकर और दुखदायक युग है. श्री कृष्ण ने हजारों वर्ष पहले इस युग के लक्षणों का वर्णन किया था, जो आज के समय में एक-एक कर सच होते दिखाई दे रहे हैं.

कलयुग में मानव स्वभाव और समाज का पतन
गरुड़ जी के प्रश्न पर श्री कृष्ण ने कलयुग की भयावहता का वर्णन करते हुए बताया कि जब पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा, तब धर्म का पूर्ण नाश हो जाएगा और अंततः प्रलय के माध्यम से सृष्टि का विनाश होगा. इस युग में मनुष्य का स्वभाव, कर्म और व्यवहार पूरी तरह बदल जाएगा. पुराणों के अनुसार, कलयुग में बलवान और शक्तिशाली व्यक्ति ही समाज का स्वामी होगा, चाहे उसका जन्म किसी भी कुल में हुआ हो. समाज में सत्य और शास्त्र का महत्व कम हो जाएगा और जो भी व्यक्ति कुछ कहेगा, लोग उसे ही सत्य मानने लगेंगे. ढोंग, पाखंड और अंधविश्वास अपने चरम पर होंगे और लोग सच्चे देवताओं की बजाय ढोंगियों को ही देवता मानकर उनकी पूजा करेंगे.

धर्म-कर्म, व्रत, उपवास और दान जैसे कार्य भी नियमों के अनुसार नहीं, बल्कि अपनी सुविधा के अनुसार किए जाएंगे. लोग व्रत में भी नियमों का पालन नहीं करेंगे और धर्म केवल दिखावे तक सीमित रह जाएगा. थोड़े से धन पर ही मनुष्य को अहंकार हो जाएगा और हर कोई स्वयं को धनवान दिखाने में लगा रहेगा.

स्त्री-पुरुष संबंध और बढ़ता स्वार्थ
कलयुग में स्त्री-पुरुष संबंधों में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा. धन और भौतिक सुख रिश्तों का आधार बन जाएंगे. कहा गया है कि जिस पुरुष के पास धन नहीं होगा, उसे पत्नी छोड़ सकती है, जबकि धनवान व्यक्ति ही आकर्षण का केंद्र होगा. विवाह जैसे पवित्र रिश्ते कमजोर पड़ेंगे और आपसी विश्वास में कमी आएगी. मनुष्य केवल स्वार्थ के लिए कार्य करेगा और दूसरों की सहायता करने में उसे आनंद नहीं मिलेगा. एक-एक पैसे के लिए लोग आपस में झगड़ेंगे और किसी की मदद करने से बचेंगे. अतिथि सत्कार और देवताओं का सम्मान भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा.

कलयुग में मनुष्य केवल लाभ के लिए गाय का पालन करेगा, लेकिन उसकी सेवा और पूजा नहीं करेगा. जीवन का अधिकांश धन घर और भौतिक सुविधाओं पर खर्च होगा, जबकि दान और धर्म के कार्यों को नजरअंदाज किया जाएगा. हर व्यक्ति का ध्यान केवल धन कमाने पर केंद्रित रहेगा और ईश्वर भक्ति से दूरी बढ़ती जाएगी. स्त्रियों के विषय में भी पुराणों में उल्लेख मिलता है कि वे भौतिक आकर्षण और इच्छाओं में अधिक उलझ सकती हैं. हालांकि इन बातों को सामाजिक परिवर्तन और प्रतीकात्मक रूप में भी देखा जाता है, जो उस समय के नैतिक पतन को दर्शाती हैं.

भविष्य की भयावह स्थिति और मनुष्य का पतन
जैसे-जैसे कलयुग आगे बढ़ेगा, समाज में अन्याय और असमानता बढ़ेगी. लोग गलत तरीकों से धन कमाने में भी संकोच नहीं करेंगे. धनवान व्यक्ति सत्ता पर हावी होंगे और समाज में शोषण बढ़ेगा. एक ओर ऐशो-आराम होगा, तो दूसरी ओर लोग भूख और गरीबी से जूझते रहेंगे. प्रकृति पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा. वर्षा अनियमित होगी, कभी सूखा तो कभी बाढ़ जैसी स्थिति बनेगी. नदियां सूखने लगेंगी और जीवनदायिनी नदियां भी धीरे-धीरे अपना स्वरूप खो देंगी. लोगों की आयु कम होती जाएगी और स्वास्थ्य कमजोर होता जाएगा.

कलयुग के अंतिम चरण में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी. रिश्तों का महत्व समाप्त हो जाएगा, परिवार टूटने लगेंगे और भाई-भाई के बीच भी दुश्मनी हो जाएगी. विवाह का पवित्र बंधन कमजोर होकर केवल औपचारिकता बन जाएगा. समाज में नैतिकता लगभग समाप्त हो जाएगी. एक कथा के अनुसार, जब पांडव वनवास पर जा रहे थे, तब सहदेव ने श्री कृष्ण से पूछा कि बिना पाप किए भी उन्हें कष्ट क्यों मिल रहा है. तब श्रीकृष्ण ने बताया कि यह आने वाले कलयुग का प्रभाव है, जो धीरे-धीरे द्वापर युग के अंत में ही दिखाई देने लगा है.

मनुष्यों के बारे में और क्या कहा गया है?
पुराणों में यह भी उल्लेख मिलता है कि माना जाता है की कलयुग की शुरुआत 302 ईसा पूर्व हुई थी. इसका मतलब ये है की अभी 5,120 वर्ष ही कलयुग बीता है और अभी से कलयुग ने अपना असर देखना शुरू कर दिया है. पुराणों के अनुसार, कलयुग का अंत जब नजदीक आएगा कलयुग का अंत होते होते मनुष्य की उम्र केवल 13 साल ही रह जाएगी और उसकी लंबाई सिर्फ 4 इंच रह जाएगी. लोग शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होते जाएंगे और छोटी-छोटी बातों पर क्रोध करने लगेंगे. रिश्तों में प्रेम की जगह स्वार्थ ले लेगा और हर व्यक्ति केवल अपने लाभ के बारे में सोचेगा. मनुष्य का मन अस्थिर रहेगा, वह एक जगह टिक नहीं पाएगा और जीवन में संतोष की कमी होगी. अधिक धन और सुख-सुविधाएं होने के बावजूद भी लोग भीतर से खाली और दुखी महसूस करेंगे. लालच इतना बढ़ जाएगा कि लोग सही और गलत का अंतर करना भी भूल जाएंगे.

कलयुग के अंत समय में मनुष्यों की आयु बहुत कम रह जाएगी और उनका शरीर भी कमजोर और छोटा हो जाएगा. समाज में हिंसा, नफरत और अपराध अपने चरम पर होंगे. लोग अपने ही परिजनों के साथ विश्वासघात करेंगे और परिवार जैसी संस्था लगभग समाप्त हो जाएगी. प्राकृतिक आपदाएं बढ़ेंगी, अन्न की कमी होगी और लोग भोजन के लिए संघर्ष करेंगे. नदियां सूखेंगी, भूमि बंजर होगी और जीवन कठिन होता जाएगा. धर्म और सत्य का अस्तित्व लगभग समाप्त हो जाएगा और अधर्म का बोलबाला होगा.

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