राफेल की पहली जंग,ऑपरेशन सिंदूर में अंबाला एयरबेस का बड़ा योगदान

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अंबाला

भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद राफेल लड़ाकू विमानों ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी पहली ही अग्निपरीक्षा दी। इसमें सफलता प्राप्त करते हुए वायु वीरों ने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अंबाला स्थित 17 स्क्वाड्रन गोल्डन ऐरो ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर न केवल आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, बल्कि उनके सैन्य एयरबेस और डिफेंसिव एयर पावर को भी पूरी तरह पंगु बना दिया। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन के म्यूजियम में अब इस शौर्य गाथा को ऑपरेशन सिंदूर वॉल के जरिए सार्वजनिक किया गया है।

जल, थल और नभ का संयुक्त प्रहार
22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों समेत 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस बर्बरता का जवाब देने के लिए भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त रूप से ऑपरेशन सिंदूर का बिगुल फूंका। रणनीति के तहत अंबाला एयरफोर्स स्टेशन को फ्रंटलाइन बेस बनाया गया, जहां से राफेल और जगुआर विमानों ने दुश्मन पर गहरा प्रहार करने की कमान संभाली।

राफेल और गोल्डन ऐरो की पहली जंग
वायुसेना में शामिल होने के बाद राफेल का यह किसी युद्ध जैसी स्थिति में पहला मुकाबला था। एयर कमोडोर बी. सतीश (वीएम) के नेतृत्व में गोल्डन ऐरो स्क्वाड्रन ने पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में सटीक लक्षित हमले किए। राफेल की अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी की मिसाइलों के आगे दुश्मन का रडार तंत्र फेल हो गया। स्क्वाड्रन ने पाकिस्तानी सैन्य एयरबेस और उनके महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे पर लंबे समय तक हमले जारी रखे, जिससे दुश्मन की जवाबी कार्रवाई की क्षमता ध्वस्त हो गई।

पदकों से चमकी अंबाला की वीर धरा
इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में अदम्य साहस दिखाने के लिए अंबाला वायुसेना स्टेशन को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कुल 26 राष्ट्रपति पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनमें वीर चक्र ग्रुप कैप्टन रंजीत सिंह सिद्धू और स्क्वाड्रन लीडर सार्थक कुमार के नाम हुआ। युद्ध सेवा पदक ग्रुप कैप्टन विकास वर्मा को मिला। वहीं वायु सेना पदक से ग्रुप कैप्टन दीपक चौहान, स्क्वाड्रन लीडर कौस्तुभ नलबड़े, मिहिर विवेक चौधरी और अमन सिंह नवाजे गए। मेंशन-इन-डिस्पैचेस से ग्रुप कैप्टन इंद्रजीत सिंह और विंग कमांडर एमआई संचिया समेत 19 जांबाज को सम्मानित किया गया। सभी वायु वीरों को दिल्ली में सम्मान मिला।

म्यूजियम में दर्ज हुआ इतिहास
अंबाला एयरबेस के म्यूजियम में बनी विशेष दीवार अब इन वीरों के नाम और उनके बलिदान की गवाह बन गई है। यह दीवार न केवल राफेल की मारक क्षमता को दर्शाती है, बल्कि उन तकनीकी श्रेष्ठताओं (उन्नत मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम) का भी विवरण देती है, जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाया। अंबाला ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह देश की रक्षा पंक्ति का सबसे मजबूत और अभेद्य किला है।

 

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