टाटा स्टील की 2030 रणनीति, 50% लौह अयस्क अब भी अपनी खदानों से लेने का लक्ष्य

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टाटा स्टील की 2030 रणनीति, 50% लौह अयस्क अब भी अपनी खदानों से लेने का लक्ष्य
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जमशेदपुर
 देश की सबसे पुरानी और प्रमुख इस्पात उत्पादक कंपनी टाटा स्टील ने 2030 के बाद कच्चे माल की आपूर्ति को लेकर एक नई और स्पष्ट रणनीति तैयार की है। झारखंड और ओडिशा में स्थित नोवामुंडी, जोड़ा ईस्ट और काटामाटी जैसी कंपनी की पुरानी खदानों की लीज 2030 में समाप्त हो रही है।

इसे देखते हुए कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि 2030 के बाद भी वह अपनी कुल जरूरत का कम से कम 50 प्रतिशत लौह अयस्क (आयरन ओर) खुद की (कैप्टिव) खदानों से ही जुटाएगी। यह कदम उत्पादन की लागत को नियंत्रित रखने और कच्चे माल की आपूर्ति के जोखिम को कम करने के लिए उठाया गया है।

कंपनी के एमडी व सीईओ टीवी नरेंद्रन और कार्यकारी निदेशक व सीएफओ कौशिक चटर्जी ने वार्षिक रिपोर्ट में शेयरधारकों को बताया कि आपूर्ति शृंखला को बाधारहित रखने के लिए विविध दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से 1907 से टाटा स्टील अपनी जरूरत का 100 प्रतिशत लौह अयस्क खुद की खदानों से ही निकालती आई है।

स्टील अथोरिटी ऑफ इंडिया (सेल) के बाद टाटा स्टील अकेली ऐसी कंपनी है जिसे खदानों से यह लागत लाभ मिलता रहा है। इस साल टाटा स्टील ने 44 मिलियन मीट्रिक टन लौह अयस्क का उत्पादन किया है। वहीं, कंपनी ने अपनी खदानों से छह मिलियन मीट्रिक टन कच्चा कोयला निकालकर अपनी 25 प्रतिशत जरूरत पूरी की है।

नीलामी की चुनौती और नई खदानें
खान और खनिज अधिनियम के तहत पुरानी लीज खत्म होने पर खदानें ई-नीलामी के जरिए आवंटित होंगी। इस नीलामी में कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अधिक प्रीमियम देना पड़ सकता है, जिससे लागत बढ़ने की आशंका है। इस संभावित असर को कम करने के लिए कंपनी अभी से तैयारी कर रही है। टाटा स्टील ने भविष्य के लिए गंधलपाड़ा और कलामंग वेस्ट जैसी नई खदानों का अधिग्रहण किया है।

इसके अलावा, अपनी स्टील उत्पादन क्षमता को 2030 तक 40 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने के लक्ष्य को देखते हुए, कंपनी ने सरकारी खनन कंपनियों एनएमडीसी और ओएमसी के साथ भी आपूर्ति समझौते किए हैं।

अपने आपूर्ति तंत्र को और मजबूत करने के लिए टाटा स्टील ने महाराष्ट्र के गड़चिरोली में लायड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है।

इस करार के तहत दोनों कंपनियां मिलकर लौह अयस्क खनन, स्लरी पाइपलाइन इन्फ्रास्ट्रक्चर, पेलेटाइजेशन और नए ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट लगाने की दिशा में काम करेंगी। कंपनी भविष्य में नीलाम होने वाली नई खदानों की लीज हासिल करने के लिए भी आक्रामक रूप से बोली लगाने की योजना बना रही है।

 

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