तीसरी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, 9वीं नहीं बल्कि 6वीं कक्षा से पढ़ाई की वकालत

Editor
3 Min Read
तीसरी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, 9वीं नहीं बल्कि 6वीं कक्षा से पढ़ाई की वकालत
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि अगर किसी तीसरी भाषा को पढ़ाना है, तो उसकी शुरुआत कक्षा 6 से ही होनी चाहिए, न कि कक्षा 9 से. उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के दौर में नई भाषा अनिवार्य करने से छात्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. यह टिप्पणी तमिलनाडु सरकार की उस अपील पर सुनवाई के दौरान आई है जिसमें राज्य में जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना और थ्री लैंग्वेज नीति को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर विचार किया जा रहा था। 

छात्रों पर पड़ेगा तनाव 
गुरुवार को सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत कक्षा 9 स्तर पर तीसरी भाषा की शुरुआत पर चिंता करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर अनावश्यक तनाव पड़ता है. यह टिप्पणी राज्य के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी) की स्थापना को सुविधाजनक बनाने के मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की अपील की सुनवाई के दौरान की गई थी. तमिलनाडु ने स्कूलों की ओर से अपनाई जाने वाली तीन भाषाओं की नीति पर चिंताओं का हवाला देते हुए जवाहर नवोदय विद्यालय यानी जेएनवी की स्थापना का लगातार विरोध किया है। 

सिखाई जानी चाहिए राज्य की भाषा 
हालांकि,  इस मामले में सीबीएसई भाषा नीति की वैधता सीधे तौर पर जारी नहीं थी. जस्टिस नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान तीसरी भाषा शुरू करने के समय पर कई टिप्पणियां कीं. उन्होंने कहा कि यह नीति में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य नहीं किया गया है. उन्होंने आगे कहा कि राज्य की भाषा सिखाई जानी चाहिए, अंग्रेजी और किसी भी तीसरी भाषा को पढ़ाया जाना चाहिए. यह हिंदी नहीं कहता है. हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता एनजीओ के वकील जी प्रियदर्शिनी ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विशेष रूप से प्रदान करती है कि किसी भी राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपी जानी चाहिए। 

जस्टिस ने किया सवाल 
जस्टिस नागरत्ना ने राज्य से पूछा कि आप हिंदी नहीं चाहते. लेकिन अगर यह संस्कृत है, तो फिर मुद्दा क्या है? राज्य के वकील ने जवाब दिया कि तीसरी भाषा केवल कक्षा 9 से अनिवार्य हो जाती है. इस मामले में जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यदि कोई भी तीसरी भाषा को पढ़ाई जानी है, तो उसे कक्षा 6 से ही पढ़ाई जानी चाहिए। 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *