दिल्ली में 1 नवंबर से प्रदूषण पर सख्ती, पुरानी गाड़ियों की एंट्री बंद और पार्किंग शुल्क होगा दोगुना

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नई दिल्ली
 दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 1 नवंबर से कई सख्त नियम लागू होंगे। इनका असर गाड़ी चलाने वालों, सरकारी और निजी कर्मचारियों के साथ निर्माण गतिविधियों पर भी पड़ेगा। इन उपायों से प्रदूषण कितना कम हो सकता है और इन्हें ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए क्या करने की जरूरत है, इस पर काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की फेलो प्रार्थना बोरा और एनवायरोकेटालिस्ट के सुनील दहिया ने क्या कहा, जानिए विस्तार से। पूनम गौड़ की रिपोर्ट…
दूसरे राज्यों की पुरानी गाड़ियों पर रोक
दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड बीएस-VI से नीचे की गाड़ियों को दिल्ली में एंट्री नहीं मिलेगी। सीएनजी, इलेक्ट्रिक और आपातकालीन गाड़ियों को छूट दी गई है।

क्या होगा असर
    10 लाख से अधिक गाड़ियां इस प्रतिबंध के दायरे में आ सकती है।
    सड़कों पर गाड़ियों की संख्या और जाम कम होने से उत्सर्जन में कमी आ सकती है।
    मौसम की स्थिति के अनुसार, गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण में 3 से 5 प्रतिशत तक कमी संभव है।

एक्सपर्ट के सुझाव
पड़ोसी जिलो में भी ऐसी पाबंदी लागू करने से ज्यादा असर होगा। पीयूसी सेंटरों पर गाड़ियों की जांच और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में सुधार जरूरी है।
पार्किंग शुल्क दोगुना
1 नवंबर से 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग में निजी गाड़ियों का शुल्क दोगुना होगा। डीएमआरसी की पार्किंग इससे बाहर रहेगी।

क्या होगा असर
    पार्किंग महंगी होने से 20 से 30 प्रतिशत लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ा सकते है।
    पार्किंग स्थलों के आसपास जाम कम हो सकता है।
    मौसम की स्थिति के अनुसार, प्रदूषण में 1 से 3 प्रतिशत तक कमी संभव है।

एक्सपर्ट के सुझाव
    निजी गाड़ी छोड़कर सार्वजनिक परिवहन अपनाने वालों को प्रोत्साहन दिया जाए। साइकिल चलाने और पैदल आने-जाने वालों के लिए भी सुविधाएं और प्रोत्साहन बढ़ाए जाए।
    सरकारी दफ्तरों का समय बदलेगा
    एमसीडी के दफ्तर सुबह 8:30 से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के दफ्तर सुबह 10 से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे।

सरकारी दफ्तरों का समय बदलेगा
1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारी ही ऑफिस आएंगे। बाकी घर से काम करेंगे।

क्या होगा असर
    अलग-अलग समय पर दफ्तर खुलने और बंद होने से सड़कों पर एक साथ गाड़ियों का दबाव कम होगा।
    पीक आवर्स में जाम 20 से 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
    सरकारी दफ्तरों के आसपास भी यातायात का दबाव घटेगा।

एक्सपर्ट के सुझाव
स्कूलों, खासकर आसपास के स्कूलों की टाइमिंग में भी बदलाव पर विचार किया जाए। त्योहारों के दौरान बाजारों के समय में जरूरत के मुताबिक बदलाव किया जाए, ताकि एक समय पर भीड़ न बढ़े

दफ्तरों में आधे कर्मचारी, घर से करेंगे काम
1 नवंबर से 31 जनवरी तक सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारी ही ऑफिस आएंगे। बाकी घर से काम करेंगे।

क्या होगा असर
    सड़कों पर निजी गाड़ियों की संख्या घट सकती है।
    कई प्रमुख रास्तों पर जाम कम होने की संभावना है।

एक्सपर्ट के सुझाव
त्योहारों के दौरान दो सप्ताह तक जरूरी कर्मचारियों को छोड़कर बाकी को वर्क फ्रॉम होम देने से ज्यादा असर हो सकता है। सार्वजनिक परिवहन से आने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन दिया जाए। नो कार डे और कार पूलिंग डे जैसे अभियान चलाए जाए।

निर्माण कार्यों पर रोक
1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के काम बद रहेंगे। अंदर के फिनिशिंग, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल काम नियमों के तहत जारी रह सकेंगे। जरूरी सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को छूट दी गई है।

क्या होगा असर
    निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल में कमी आएगी।
    निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरो को रोजगार मिलने पर असर पड़ सकता है।

एक्सपर्ट के सुझाव
निर्माण सामग्री के परिवहन और इस्तेमाल पर सख्त निगरानी जरूरी है। सड़कों की धूल, खासकर अंदरूनी सड़कों की धूल को नियंत्रित करने पर ज्यादा ध्यान देना होगा। सर्दियां शुरू होने से करीब 15 दिन पहले सड़क खुदाई जैसे नए निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की जरूरत है।

 

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