मसौढ़ी में 67 दिन बाद मिली चोरी गई राम-जानकी की अष्टधातु मूर्तियां

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पटना

 बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी से आस्था से जुड़ी एक अनोखी खबर सामने आई है। दो महीने पहले छाता ठाकुरबाड़ी मंदिर से करीब 6 करोड़ रुपये मूल्य की अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां चोरी हो गई थीं। अब ये मूर्तियां रहस्यमय तरीके से करीब 67 दिन बाद वापस मिल गई हैं। इन मूर्तियों को खोजने में पुलिस नाकाम रही थी। सोमवार की रात अष्टधातु की प्राचीन मूर्तियां सड़क किनारे कपड़े में लपेटकर लावारिस हालत में छोड़ गया। ग्रामीण इसे भगवान का चमत्कार और चोरों पर दैवीय भय का असर मान रहे हैं।

16 मार्च को चोरी हुई थीं राम, जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियां
मिली जानकारी के मुताबिक, मसौढ़ी के छाता ठाकुरबाड़ी मंदिर से बीते 16 मार्च की रात करीब 100 साल पुरानी भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण की अष्टधातु की तीन मूर्तियां चोरी हो गई थीं। इसके साथ ही चांदी के दो मुकुट भी गायब कर दिए गए थे। घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया था। चोरी को लेकर मसौढ़ी थाना में मामला दर्ज कराया गया था।

तीन गांव के बाहर सड़क किनारे छोड़ी गईं मूर्तियां चांदी के मुकुट
पुलिस ने कई स्थानों पर छापेमारी और जांच की, लेकिन दो महीने तक मूर्तियों का कोई सुराग नहीं मिला। इसी बीच छाता गांव, शाहाबाद और लखनौर गांव के सीमावर्ती इलाके में सड़क किनारे कपड़े में लिपटी हालत में तीनों मूर्तियां और चांदी के मुकुट बरामद हुए।

भगवान के डर से मूर्तियां छोड़ गए चोर: ग्रामीण
मूर्तियों के मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में खुशी और भक्ति का माहौल बन गया। ग्रामीणों का कहना है कि 'भगवान की महिमा ऐसी है कि चोर भी डर गए और मूर्तियां छोड़कर भाग निकले।'
मसौढ़ी थानाध्यक्ष विवेक भारती मूर्तियां मिलने की खबर पाते ही मौके पर पहुंच गए। उन्होंने जरूरी कागजी कार्रवाई कर मूर्तियां मंदिर प्रबंधन समिति को सौंप दी।

मूर्तियां चोरी होने के बाद पुलिस लगातार जहानाबाद, मसौढ़ी सहित अन्य जगहों पर छापेमारी कर रही थी। इस वजह से चोर मूर्तियों को बाजार में खपा नहीं पाए और पकड़े जाने के डर से मूर्तियां रखकर भाग गए।

ढोल-नगाड़ों के साथ निकाली शोभायात्रा, फूल बरसाकर लोगों ने किया स्वागत
इसके बाद ग्रामीणों ने गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ भगवान श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की भव्य शोभायात्रा निकाली। श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर भगवान का स्वागत किया और पूरे विधि-विधान के साथ छाता ठाकुरबाड़ी मंदिर में पुनः स्थापना की गई। मंदिर परिसर 'जय श्रीराम' और 'सियावर रामचंद्र की जय' के नारों से गूंज उठा।

 

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