राज्य वित्त आयोग 6 जून को करेगा नर्मदापुरम का दौरा

Editor
4 Min Read

भोपाल 

मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग 6 जून को नर्मदापुरम संभाग की समीक्षा करेगा, जिसमें संबंधित जिलों के कलेक्टर्स, नगर पालिका अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

राज्य वित्त आयोग ने शुक्रवार को मंत्रालय में वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं वाणिज्यिक कर विभाग की समीक्षा बैठक की। देश में स्थानीय स्व शासन और जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के लिए राज्य वित्त आयोग ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग के अध्यक्ष  जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व स्रोतों और बजटीय प्रबंधन को लेकर मैराथन मंथन हुआ। बैठक में राज्य वित्त आयोग के सदस्य  के.के. सिंह एवं सदस्य सचिव  वीरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। महत्वपूर्ण बैठक में वित्त विभाग, वाणिज्यिक कर विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। आयोग के अध्यक्ष  पवैया ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों की दीर्घकालिक वित्तीय सुदृढ़ता के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तथ्यों और आंकड़ों का संकलन कर विस्तृत अनुशंसाएं तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

अध्यक्ष  पवैया ने केंद्रीय और राज्य वित्त आयोगों द्वारा अनुशंसित अनुदानों के हस्तांतरण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय निकायों की लेखांकन और ऑडिट व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया। बैठक में आगामी सोलहवें वित्त आयोग के लिए आवश्यक वित्तीय आंकड़ों और रणनीतिक व्यवस्थाओं पर भी विभागों के साथ विस्तृत चर्चा हुई, जिससे केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का राज्यों को अधिकतम लाभ मिल सके। समीक्षा में स्थानीय निकायों को प्रदान की जाने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति और संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत प्राप्त राशि के हस्तांतरण पर भी विचार-विमर्श किया गया।

वाणिज्यिक कर विभाग ने बैठक में राज्य के कर राजस्व, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के प्रभाव और इसके लागू होने के बाद प्राप्त क्षतिपूर्ति का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत किया। इस बात पर विचार किया गया कि जीएसटी युग में स्थानीय निकायों के राजस्व को कैसे सुदृढ़ किया जाए। इसके अलावा, संपत्ति अंतरण पर लगने वाले अतिरिक्त मुद्रांक शुल्क और अन्य कराधान प्रावधानों की भी समीक्षा की गई, जिससे निकायों की आंतरिक आय में वृद्धि की जा सके।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर पंचम, पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग से प्राप्त राशि और उसके उपयोग की स्थिति जांची गई। बैठक में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों और ग्राम स्तर पर सेवा प्रदायगी की समीक्षा हुई। आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पंच-परमेश्वर योजना के तहत बुनियादी ढांचे का विकास और ई-पंचायत व्यवस्था के जरिए होने वाले डिजिटलाइजेशन की प्रगति देखी। साथ ही, पंचायतों की आय के आंतरिक स्रोत, कर संग्रहण क्षमता और शेल्टर टैक्स से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा की गई।

आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि स्थानीय निकायों की केवल अनुदानों पर निर्भरता को कम कर उन्हें वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना होगा। इसके लिए कर संग्रहण क्षमता को सुदृढ़ करने, वित्त आयोग के अनटाइड अनुदानों के प्रभावी एवं परिणामोन्मुख उपयोग और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए सभी संबंधित विभागों से व्यावहारिक सुझाव प्राप्त किए गए हैं, जिनके आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

 

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live