बिहार में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा, लखीसराय के कजरा में 185 मेगावाट की सबसे बड़ी यूनिट स्थापित

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 पटना
 ग्रीन इनर्जी के क्षेत्र में बिहार की स्थिति यह है कि सोलर इनर्जी के क्षेत्र में गतिविधियां अधिक है। अपेक्षाकृत कम क्षमता वाले सोलर इनर्जी यूनिट उत्तर बिहार की तुलना में दक्षिण बिहार स्थित जिलों में अधिक आ रहे।

अब तक की सबसे बड़ी यूनिट लखीसराय के कजरा में लगी है जिसकी क्षमता 185 मेगावाट है। यह कजरा की प्रथम यूनिट है।

बिजली कंपनी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार साेलर इनर्जी के क्षेत्र में अभी 367.1 मेगावाट की कुल क्षमता की अलग-अलग यूनिट पर काम हो रहा है।

गयाजी में कई यूनिट पर हो रहा काम
दक्षिण बिहार के गयाजी जिले में कई यूनिटों पर काम हो रहा है। इनमें एक यूनिट गयाजी के शेरघाटी में है जिसकी क्षमता 10 मेगावाट है।

गयाजी के ही आमस में 15 मेगावाट और 10 मेगावाट वाली अलग यूनिट, बहेरा में 15 मेगावाट क्षमता की यूनिट अस्तित्व में आने वाली है।

इसी तरह नवादा जिला स्थित अकबरपुर में 10 मेगावाट, दरियापुर में तीन मेगावाट की सोलर यूनिट अस्तित्व में आ रही है। औरंगाबाद में 20 मेगावाट की सोलर यूनिट आ रही।

उत्‍तर बिहार के कई ज‍िलों में चल रहा काम
पटना के बिक्रम में नहर किनारे दो मेगावाट की सोलर यूनिट कमीशंड है। उत्तर बिहार की बात करें तो पश्चिम चंपारण के रामनगर में पांच मेगावाट, मुडेरा में 10 मेगावाट, दरभंगा के मुंदरपुर में 1.6 मेगावाट, सुपौल में फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट0.5 मेगावाट यूनिट पर काम हो रहा।

कजरा के बाद सबसे अधिक क्षमता 50 मेगावाट वाली यूनिट बांका में है। बांका में इसके अतिरिक्त दो अन्य यूनिट पर काम हो रहा।

इसमें एक की क्षमता 15 और एक की 10 मेगावाट है। यानी वहां 75 मेगावाट क्षमता की सोलर इनर्जी उपलब्ध होगी। बांका के बौंसी में पांच मेगावाट क्षमता की एक यूनिट अलग से है।

 

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