दृष्टिबाधित बच्चों के लिए स्मार्ट विजन चश्मा, AI तकनीक से पढ़ाई और जीवन होगा आसान

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दृष्टिबाधित बच्चों के लिए स्मार्ट विजन चश्मा, AI तकनीक से पढ़ाई और जीवन होगा आसान
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 बोकारो
Blind Vision Foundation Bangalore की ओर से दृष्टिबाधित बच्चों की सुविधा के लिए स्मार्ट विजन चश्मा बनाया गया है। एआई व मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित यह चश्मा बच्चों की शिक्षा में सहयोग करेगा। वह बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी सहित 59 भारतीय भाषाओं में लिखित पुस्तकों को पढ़ कर सुनाएगा। उन्हें न केवल पाठ्य पुस्तकों, बल्कि जनरल नालेज की भी जानकारी देगा।

यह चश्मा बच्चों को रास्ते में आने वाली बाधा, वाहन आदि की भी जानकारी देगा। साथ ही उनके स्वजनों को उनके सही लोकेशन की भी जानकारी उपलब्ध कराएगा। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों का सहारा बनेगा। उनके जीवन की राह को आसान करेगा। इसके माध्यम से बच्चे न केवल बेहतर तरीके से शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे, अपितु जीवन की राह पर मजबूती से आगे कदम बढ़ा सकेंगे।

ऐसे काम करता है स्मार्ट विजन चश्मा
ब्लाइंड विजन फाउंडेशन बेंगलुरु के प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल ने कहा कि इस चश्मा के बीच में कैमरा लगा रहता है। चश्मा में सेंसर, बजर, बैटरी, फ्लैश लाइट, स्पीकर आदि लगा रहता है। स्मार्ट फोन में इससे संबंधित एप्लीकेशन डाउनलोड किया जाता है। इसमें लगे कैमरे व सेंसर उपयोगकर्ता के परिवेश को स्कैन करते हैं और एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो (आवाज) के रूप में बदलकर बताते हैं।

चश्मे में लगा फ्रंट कैमरा उपयोगकर्ता के सामने की तस्वीर खींचता है, जबकि लिडार सेंसर आसपास की दूरी और बाधाओं का पता लगाते हैं। कैप्चर की गई छवियों और डेटा को एआई माडल द्वारा प्रोसेस किया जाता है। यह बाब्जेक्ट्स (कुर्सी, मेज आदि) लोगों के चेहरों और लिखित शब्दों को पहचानता है। चश्मे में लग बजर सक्रिय हो जाता है। स्पीकर से बीप की आवाज आने लगती है।

उपयोगकर्ता को बताया जाता हैं कि उनके सामने दीवार, गड्ढ़ा, वाहन आदि हैं। वे किसी किताब के लिखे हुए शब्दों को पढ़कर सुनाते हैं। जैसे ही दृष्टिबाधित विद्यार्थी चश्मे के आगे पुस्तक को रखते हैं, वैसे ही चश्मे में लगा कैमरा उसकी तस्वीर खींच लेता है। इसके बाद एआई तकनीक के माध्यम से उसे आडियो के रूप में बदल देता है।

स्पीकर के जरिए उपयोगकर्ता को पुस्तक में लिखे शब्द सुनाए जाते हैं। वह इस डाटा को सुरक्षित रख सकता है। इसके माध्यम से परीक्षा की तैयारी कर सकता है। यह चश्मा भारत सहित विभिन्न देशों की करेंसी की भी पहचान करता है। बच्चों को जनरल नालेज से संबंधित जानकारी देता है। इसमें इमरजेंसी मोड होता है, जो उपयोगकर्ता का फोटो व लाइव लोकेशन स्वजनों को वाट्स एप पर उपलब्ध कराता है।

साथ ही मोबाइल फोन से उनके लोकेशन की जानकारी देता है। उपयोगकर्ता अपनी पसंद के गाने भी सुन सकते हैं। यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक है। कहा कि कारपोरेट सीएसआर के सहयोग से यह चश्मा दृष्टिबाधित बच्चों को निश्शुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।

आशा लता केंद्र के निदेशक भवानी शंकर जायसवाल व प्राचार्य प्रमोद दुबे ने कहा कि इस चश्मा से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को काफी लाभ होगा। इसके सहारे बच्चे न केवल बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकेंगे, बल्कि बेहतर तरीके से रोजमर्रा के काम कर सकेंगे।

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