शशि थरूर बोले,पाकिस्तान की मध्यस्थता से भारत का कद प्रभावित नहीं होता

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नई दिल्ली

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भारत की विदेश नीति, विशेष रूप से पाकिस्तान और अमेरिका के साथ संबंधों पर अपनी बेबाक राय रखी है। थरूर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अगर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता किया भी है तो इससे भारत का कद छोटा नहीं होगा। आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी अक्सर पाकिस्तान की मध्यस्थता के बहाने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करती है और मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाती है।

शशि थरूर ने पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह तब तक नहीं बदलेगा जब तक सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती।

शशि थरूर ने एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान को ओसामा बिन लादेन जैसे मामले में माफ कर दिया, जबकि वह वर्षों तक उनकी नाक के नीचे छिपा रहा। थरूर ने इसे पाकिस्तान का 'दोहरा चरित्र' करार दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता या कूटनीतिक नरमी नहीं दिखाएगा, जब तक वह अपनी धरती पर पनप रहे आतंकी समूहों को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पर्याप्त सबूत होने के बावजूद पाकिस्तान ने आज तक किसी भी दोषी को सजा नहीं दी है।

ईरान-अमेरिका तनाव पर भारत की भूमिका
जब उनसे पूछा गया कि भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका क्यों नहीं निभाई तो थरूर ने कहा, "भारत के संबंध सभी प्रमुख देशों के साथ अच्छे हैं। पाकिस्तान का ऐसा हाल नहीं है। अगर पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की तो इससे भारत का कद कम नहीं होता है।"

ट्रंप की टिप्पणी पर चुप्पी की सलाह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के संदर्भ में की गई विवादास्पद 'नरक' वाली टिप्पणी पर थरूर ने भारत सरकार को संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पोस्ट जैसी छोटी बातों पर भारत को आक्रामक होने की जरूरत नहीं है। यह हमारी कूटनीति के स्तर के अनुकूल नहीं है। अगर मैं सरकार में होता तो इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर देता।"

आपको बता दें कि 2016 के ऊरी हमले और 2019 के पुलवामा हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान के प्रति 'आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते' की नीति अपनाई है। भारत का वैश्विक मंचों पर हमेशा यह रुख रहा है कि पाकिस्तान जब तक लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी गुटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करता तब तक कूटनीतिक सुधार संभव नहीं है।

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