बलिया में रोहिंग्या व्यक्ति को 3 साल की सजा, फर्जी दस्तावेज का मामला

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 बलिया

उत्तर प्रदेश के बलिया में स्थानीय अदालत ने बांग्लादेश के रोहिंग्या समुदाय के एक व्यक्ति को दोषी करार देते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। दरअसल, कोर्ट ने फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट के जरिए भारत में अवैध रूप से रहने, विदेश यात्रा करने और जमीन की रजिस्ट्री कराने के मामले में ये सजा सुनाई है।

मामले में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की वाराणसी यूनिट ने 14 मार्च 2023 को कार्रवाई करते हुए बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित रोहिंग्या कैंप निवासी अब्दुल अमीन पुत्र अब्दुल कलाम और म्यांमार के मंडू अराकान निवासी मोहम्मद अरमान उर्फ अबू तल्हा को बलिया शहर के गड़वार मोड़ के पास से गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान आरोपियों के पास से भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, विदेशी सिम कार्ड, विदेशी मुद्रा और सिक्के बरामद किए गए थे।

जांच में सामने आया कि अब्दुल अमीन ने स्थानीय लोगों की मदद से फर्जी तरीके से भारतीय दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के पंडुआ क्षेत्र में जमीन की रजिस्ट्री कराई और फर्जी पासपोर्ट बनवाकर दो बार बहरीन तथा दो बार सऊदी अरब की यात्रा भी की। इस मामले में एटीएस निरीक्षक भारत भूषण तिवारी की तहरीर पर शहर कोतवाली में भारतीय दंड संहिता और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।

पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के अनुसार, अपर जिला जज राम कृपाल की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब्दुल अमीन को विदेशी अधिनियम समेत अन्य धाराओं में दोषी मानते हुए तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

इटावा में बांग्लादेशई किशोरी का मेडिकल
उधर, इटावा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के नगला उदई के पास संदिग्ध हालत में मिली बांग्लादेश निवासी किशोरी का सोमवार को पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराया। अब उसकी उम्र का निर्धारण होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार यदि किशोरी नाबालिग पाई जाती है तो उसे जुवेनाइल कोर्ट के आदेश पर बालिका बाल सुधार गृह भेजा जाएगा, जबकि बालिग होने पर अवैध रूप से सीमा पार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

प्रभारी निरीक्षक केके मिश्रा ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में किशोरी ने खुद को बांग्लादेश का निवासी बताया है। उसने बताया कि वह काम के सिलसिले में दो महिलाओं के साथ दिल्ली आई थी और वहां से बागपत जाने के लिए निकली थी, लेकिन रास्ता भटककर दूसरी ट्रेन में बैठ गई और इटावा पहुंच गई। नगला उदई क्षेत्र में घूमते देख स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस को किशोरी के पास से केवल ट्रेन टिकट मिला है, कोई पहचान पत्र या अन्य दस्तावेज नहीं मिले। भाषा समझने में दिक्कत होने पर ट्रांसलेटर और एआई चैट की मदद से पूछताछ की गई। किशोरी ने बताया कि उसके परिवार में मां, दादी, एक बहन और तीन भाई हैं, जबकि पिता की मौत हो चुकी है। पुलिस अब मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट में पेश कर आगे की कार्रवाई करेगी।

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