झारखंड के गांवों में कचरे से बनेगी सड़क, स्वच्छता के साथ मिलेगा रोजगार भी

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 रांची
 ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन को नई दिशा देने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने ठोस कचरे से सड़क निर्माण सामग्री तैयार करने की पहल शुरू की है।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के तहत अनगड़ा प्रखंड के गेतलसूद गांव को माडल गांव के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस परियोजना में नाडेप के माध्यम से गांवों में एकत्रित गीले और सूखे कचरे को रिसाइकिल कर सड़क निर्माण के लिए उपयोगी मटेरियल तैयार किया जाएगा।

विभाग ने जिले के कुल 1329 गांवों को माडल गांव के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। पश्चिमी डिवीजन द्वारा 607 गांवों का चयन किया गया है, जिनमें से 240 गांवों में नाडेप का निर्माण कर गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग संग्रहित किया जा रहा है।

इन केंद्रों से नियमित रूप से कचरा उठाव कर प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा, जहां से सड़क निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री तैयार की जाएगी।

पूर्वी डिवीजन में भी तेजी से चल रहा कार्य
पूर्वी डिवीजन की ओर से 721 गांवों का चयन किया गया है। इनमें लगभग 220 गांवों को माडल गांव के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।

इन गांवों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नाडेप, जल-जमाव की समस्या के समाधान के लिए सोख्ता (सोफिट) तथा महामारी नियंत्रण के लिए भस्मक का निर्माण कराया गया है। इन सुविधाओं के आधार पर गांवों को मॉडल गांव की श्रेणी में शामिल किया जा रहा है।

गेतलसूद, डाहू समेत कई गांवों को मिलेगा लाभ
अनगड़ा के गेतलसूद, ओझामांझी पंचायत के डाहू सहित कई गांवों में इस योजना से तैयार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। विभाग का उद्देश्य केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि मॉडल गांवों में सड़क, नाली और अन्य आधारभूत सुविधाओं का भी विकास करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं का स्तर बेहतर हो सके।

प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पर विशेष जोर
स्वच्छ भारत मिशन के स्टेट कोऑर्डिनेटर संतोष कुमार ने बताया कि प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर व्यापक स्तर पर काम किया जा रहा है।

कचरे से सड़क निर्माण के लिए आवश्यक रॉ-मटेरियल तैयार करने की प्रक्रिया विकसित की जा रही है। सामग्री तैयार होने के बाद विभिन्न गांवों में सड़क निर्माण कार्य भी शुरू किया जाएगा।

ग्रामीणों को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर
स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक संजय कुमार ने कहा कि भारत सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों को प्लास्टिक मुक्त बनाना है।

इसके साथ ही ग्रामीणों को कचरा प्रबंधन और रिसाइक्लिंग गतिविधियों से जोड़कर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे गांवों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

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