राजस्थान वानिकी परियोजना की समीक्षा: मुख्य सचिव ने 2026-27 कार्ययोजना को दी मंजूरी

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राजस्थान वानिकी परियोजना की समीक्षा: मुख्य सचिव ने 2026-27 कार्ययोजना को दी मंजूरी
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 जयपुर
राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना की तीसरी उच्चाधिकार समिति की बैठक गुरुवार को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में  शासन सचिवालय में आयोजित हुई। बैठक में एएफडी, फ्रांस द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना के विभिन्न घटकों की विस्तृत समीक्षा कर वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों में लक्ष्य पूर्ति के साथ परिणाम जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक गतिविधि का प्रभाव स्थानीय समुदाय, पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों पर सकारात्मक एवं परिवर्तनकारी रूप में परिलक्षित होना चाहिए।

परियोजना कार्यों में दिखे परिवर्तन, सफलता की कहानियां बनें प्रेरणा
मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की सफलता के उदाहरण सामने आने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मॉडल विकसित किए जाएं जिनसे क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ने, भूजल स्तर में सुधार, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि परियोजना के कार्य परिवर्तनकारी होने चाहिए। इनका लाभ आमजन प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें।

 हितग्राहकों और स्थानीय जनसमुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना से जुड़े हितग्राहकों एवं स्थानीय समुदायों के विचारों और सुझावों को भी प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप कार्यों की योजना बनाकर उनका क्रियान्वयन किया जाए।

तकनीकी मानकों के अनुरूप हो कार्यों का क्रियान्वयन
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी गतिविधियों का निष्पादन निर्धारित तकनीकी मापदंडों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप किया जाए। उन्होंने परियोजना के प्रत्येक घटक की नियमित मॉनिटरिंग एवं समय-समय पर प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
 
स्थानीय प्रजातियों का संरक्षण और उच्च घनत्व हरित क्षेत्र हो विकसित
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पौधारोपण एवं चारागाह विकास कार्यों में स्थानीय एवं क्षेत्र विशेष के अनुकूल प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने उच्च घनत्व वाले हरित क्षेत्र विकसित करने, बड़े आकार के पौधों के रोपण तथा उन्नत एवं बड़ी नर्सरियों के विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा।

परिवर्तन के सूचकांक का निर्धारण किया जावे
मुख्य सचिव महोदय ने निर्देश दिये कि परियोजना में किये जा रहे कार्यों के प्रभाव का आंकलन करने के लिए परिवर्तन के सूचकांकों का निर्धारण कर परियोजना के प्रारम्भ एवं वर्तमान स्थिति की तुलनात्मक समीक्षा करें।

जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधार के प्रयास हों प्रभावी
उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण संरचनाओं का विकास इस प्रकार किया जाए कि भूजल स्तर में वृद्धि हो तथा स्थानीय जल संसाधनों का पुनर्भरण सुदृढ़ हो। मृदा एवं जल संरक्षण गतिविधियों के दीर्घकालिक प्रभावों का भी नियमित मूल्यांकन किया जाए।

एएफडी ऋण अनुबंध और लंबित वित्तीय मामलों के शीघ्र निस्तारण के निर्देश
मुख्य सचिव ने फ्रांसीसी विकास एजेंसी एएफडी की द्वितीय ट्रांच से संबंधित ऋण अनुबंध प्रक्रिया को आगामी जुलाई  तक पूर्ण करने के निर्देश दिए।

अंतर-विभागीय समन्वय से हासिल होंगे बेहतर परिणाम
मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजना के उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच मजबूत समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परियोजना कार्यों को गुणवत्तापूर्ण, समयबद्ध एवं परिणामोन्मुखी ढंग से पूर्ण किया जाए। इससे विकसित राजस्थान के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन विभाग श्री आनंद कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हाफ) श्री अरिजीत बनर्जी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास सुश्री शिखा मेहरा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक श्री के. सी.ए. अरूण प्रसाद, राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता विकास परियोजना निदेशक श्री राजेश गुप्ता एवं वित्त, कृषि, आयोजना, महिला बाल विकास, पर्यटन, ग्रामीण विकास विभाग सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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