TET विवाद में मोहन सरकार को राहत, सुप्रीम कोर्ट में इस दिन होगी अहम सुनवाई

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भोपाल
शिक्षकों के हित में लगातार प्रयास कर रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस बार सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश शासन द्वारा किए गए सतत प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। दरअसल, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET-Teacher Eligibility Test) से जुड़े प्रकरण में दायर रिव्यू याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण से संबंधित आवेदनों को स्वीकार करते हुए मामले को ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दे दिया है।

कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई 13 मई को दोपहर 2 बजे के लिए निर्धारित की गई है। ये सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के अधीन की जाएगी। ये निर्णय शिक्षकों के पक्ष को विस्तार से रखने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, मामले के न्यायिक पुनर्विचार का मार्ग प्रशस्त करेगा।

महत्वपूर्ण कानूनी पहल
आपको बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश शासन ने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए ये महत्वपूर्ण कानूनी पहल मानी जा रही है। सीएम ने कहा है कि, प्रदेश सरकार शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही इस प्रकरण में पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। शासन को विश्वास है कि, न्यायालय में पेश किए जाने वाले तथ्यों के आधार पर शिक्षकों को जल्द ही न्याय भी जरूर मिलेगा।

शिक्षक कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध
गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश शासन ने 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसमें शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करनी जरूरी बताया गया है। इस फैसले के बाद कई कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन मोहन यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पैदा हुई स्थितियों की जानकारी उन्हें दी थी। इसके बाद मुख्यमं ने सभी को आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोर्ट की प्रक्रिया में किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो। सरकार हर समय शिक्षकों के साथ है।

शिक्षकों को मिली सरकारी वकालत
प्रदेश सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करना शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण उम्मीद की किरण माना जा रहा है। इस कदम से ये संदेश जाता है कि, राज्य स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों के अधिकारों का भी पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है। न्यायालय की सुनवाई के बाद उम्मीद है कि, शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनकी स्थिति को मजबूत करने वाले फैसले आएंगे। साथ ही, इस पूरे मामले ने शिक्षकों को ये विश्वास भी दिया कि, उनकी आवाज को सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा रही है और उनके भविष्य को संवारने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

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