5 बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, MPPSC पास कर अफसर बनी किसान की बेटी राधा

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5 बार असफल होने के बाद भी नहीं मानी हार, MPPSC पास कर अफसर बनी किसान की बेटी राधा
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राजगढ़

जब हौसले मजबूत हों और आंखों में कुछ कर गुजरने का ख्वाब हो, तो गरीबी और विपरीत परिस्थितियां भी रास्ता छोड़ देती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा की रहने वाली राधा चंद्रवंशी की। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के घोषित हुए नतीजों में ब्यावरा के छोटे से गांव कचनारिया की बेटी राधा ने कामयाबी का ऐसा परचम लहराया है, जिसने पूरे जिले का सिर फख्र से ऊंचा कर दिया है। गरीब किसान की लाडली राधा चंद्रवंशी ने MPPSC में 50वीं रैंक हासिल की है और वो खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनी हैं।

आसानी से नहीं मिली सफलता
राधा की यह सफलता आसानी से नहीं मिली। इसके पीछे आंसुओं, त्याग और अंतहीन रातों की मेहनत छुपी है। साल 2019 से पीएससी की तैयारी कर रही राधा ने पांच बार राज्य सेवा परीक्षा दी। कई बार प्री नहीं निकला, तो तीन बार मुख्य परीक्षा (मेंस) की दहलीज पर पहुंचकर सपना टूट गया, लेकिन राधा ने हार नहीं मानी। करीब 17 साल बाद जब एफएसओ की भर्ती निकली, तो उन्होंने हिंदी माध्यम से केवल छह महीने में दिन-रात एक करके पूरा सिलेबस खत्म किया और पहले ही प्रयास में अफसर बनकर दिखाया।

साधारण किसान की बेटी बनी अफसर
राधा चंद्रवंशी के पिता कालूराम चंद्रवंशी एक साधारण किसान हैं। उन्होंने तंगहाली के बावजूद अपनी बेटी की पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी। गांव के सरकारी स्कूल और ब्यावरा की कन्या शाला से 12वीं करने के बाद राधा पढ़ाई के लिए इंदौर गईं। आज वह अपने पूरे परिवार में न सिर्फ एकमात्र उच्च शिक्षा हासिल करने वाली बेटी हैं, बल्कि सीधे क्लास-2 अधिकारी बन चुकी हैं। जब परिणाम आया तो पिता की पथराई आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और पूरे गांव ने मिठाइयां बांटकर अपनी इस बेटी का स्वागत किया।

'मेहनत में ईमानदारी रखो, कामयाबी जरूर कदम चूमेगी'
राधा ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के विश्वास और अपनी निरंतरता को दिया है। वह कहती हैं, हालात चाहे कितने भी बुरे हों, अगर आपका लक्ष्य साफ है और आप ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं, तो सफलता मिलकर ही रहेगी। असफलताओं से घबराने की बजाय सिलेबस के अनुसार लगातार रिवीजन करते रहना चाहिए। अब राधा का अगला सपना यूपीएससी पास कर देश की सेवा करना है। 5 बार की असफलता के बाद कामयाबी मिलने की राधा चंद्रवंशी की ये कहानी उन हजारों युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है जो असफलता मिलने पर निराश हो जाते हैं।

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