बाराबंकी में रंग दे बसंती का युवा संवाद, छात्रों को मिला नवाचार और एआई का गुरुमंत्र

Editor
4 Min Read

बाराबंकी में रंग दे बसंती का युवा संवाद, छात्रों को मिला नवाचार और एआई का गुरुमंत्र

साईं कॉलेज में इंटर के छात्र-छात्राओं ने क्विज और टैलेंट क्रिएशन में लिया हिस्सा

 रंग दे बसंती टीम ने विजेताओं को ट्रॉफी से किया सम्मानित

प्रदेशभर में प्रतिभाओं का चयन, नवाचार के लिए छात्रों को 15 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद

कवि सम्मेलन से वॉल पेंटिंग तक, रचनात्मक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं को मंच दे रहा रंग दे बसंती

लखनऊ
 उत्तर प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और माफिया राज व भय की संस्कृति के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से ‘रंग दे बसंती’ अभियान के तहत विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बाराबंकी के लखपेड़ाबाग स्थित साईं कॉलेज में अभियान की टीम ने इंटरमीडियट के छात्र-छात्राओं से संवाद किया।

इस दौरान विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी के साथ भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने तथा शिक्षा के साथ नवाचार और एआई आधारित शिक्षा की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने क्विज प्रतियोगिता और टैलेंट क्रिएशन जैसी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। कॉलेज के प्रिंसिपल सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि रंग दे बसंती जैसे मंच विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होंगे। ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्र-छात्राओं को अपनी प्रतिभा को निखारने और आत्मविश्वास के साथ उसे प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

रंग दे बसंती की टीम ने प्रतियोगिताओं में विजयी छात्र-छात्राओं नैतिक, शगुन यादव, प्रखर, उमैरा कुल्सुंग और अदिति सोनी को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया। रंग दे बसंती के प्रदेश संयोजक ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से योग्य छात्र-छात्राओं का चयन किया जा रहा है। चयनित प्रतिभाओं को शैक्षिक गतिविधियों के साथ नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए 15 हजार रुपये तक की आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इसके लिए प्रदेश के सभी जनपदों में फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। आवेदन फॉर्म रंग दे बसंती के इंस्टाग्राम पेज और वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

अभियान के तहत प्रदेश के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों और जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में कवि सम्मेलन, लखनऊ विश्वविद्यालय में वॉल पेंटिंग तथा मुजफ्फरनगर के एसडी कॉलेज में कॉमिक बुक विमोचन जैसे कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक अभियान की पहुंच बढ़ाई जा रही है।

अभियान की मूल भावना बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग है। इसके माध्यम से युवाओं को डर और दबाव की संस्कृति के बजाय अभिव्यक्ति, रचनात्मकता और संवाद का मंच देने पर जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार की ओर से युवाओं को शिक्षा, कौशल, तकनीक और नवाचार से जोड़ने पर दिए जा रहे जोर के बीच रंग दे बसंती जैसे अभियान सकारात्मक और रचनात्मक युवा ऊर्जा को दिशा देने की पहल के रूप में सामने आ रहे हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live