राजस्थान के सरकारी स्कूलों पर अब अफसरों की सीधी नजर, 41 अधिकारियों को मिली जिलों की जिम्मेदारी

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बीकानेर
 सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाओं की निगरानी अब सिर्फ रिपोर्ट और पोर्टल तक सीमित नहीं रहेगी। शिक्षा विभाग ने 41 वरिष्ठ प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों को जिलों का प्रभारी बनाकर उन्हें नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी है।

अफसर मौके पर स्कूल की व्यवस्थाएं, सुरक्षा, नामांकन और बच्चों के सीखने का स्तर देखेंगे। स्थानीय स्तर पर समाधान योग्य कमी मिली, तो उसे मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर दूर कराने पर जोर रहेगा।

बीकानेर जिले की जिम्मेदारी डॉ. नरेन्द्र चौधरी को सौंपी गई है, जबकि जयपुर का जिम्मा कानाराम मीना को दिया गया है। स्कूल शिक्षा एवं भाषा, पुस्तकालय व पंचायतीराज (प्रारंभिक शिक्षा) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव के आदेश के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है।

हर दौरे में पीएम श्री और आवासीय स्कूल होंगे एजेंडे में
प्रत्येक निरीक्षण के दौरान कम से कम दो पीएम श्री और दो आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा। इसके अलावा अन्य विद्यालयों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी। पेयजल की उपलब्धता, छात्र-छात्राओं के लिए अलग और क्रियाशील शौचालय, स्कूल भवन की स्थिति और शैक्षणिक वातावरण प्रमुख जांच बिंदु होंगे। पीएम श्री और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्वीकृत क्षमता के मुकाबले नामांकन की स्थिति भी देखी जाएगी।

जर्जर भवन पर अब सिर्फ रिपोर्ट नहीं, लाल ‘एक्स’ भी
असुरक्षित या जर्जर घोषित स्कूल भवनों और कमरों को लेकर निरीक्षण में विशेष सख्ती रहेगी। ऐसे भवन या कमरों पर तत्काल ताला लगाने और दरवाजे पर लाल रंग से ‘एक्स’ का निशान लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा, सीसीटीवी, भवन और शौचालयों की स्थिति भी जांची जाएगी। स्कूल परिसर में संचालित सह-स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों के भवनों की सुरक्षा भी निरीक्षण का हिस्सा होगी।

स्कूल की जमीन से लेकर कबाड़ तक पर नजर
जिला प्रभारी ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत स्कूलों में पौधरोपण और हरियाली की स्थिति देखेंगे। जिन सरकारी स्कूलों के पास भूमि का पट्टा नहीं है, वहां पट्टा दिलाने की कार्रवाई की प्रगति भी जांची जाएगी। स्कूल परिसरों में पड़ी अनुपयोगी सामग्री और कबाड़ के नियमानुसार नीलामी अथवा निस्तारण की स्थिति भी देखी जाएगी। शिक्षकों के नवाचारों को प्रोत्साहित करने तथा चित्रकला, निबंध जैसी प्रतियोगिताओं की गतिविधियों को पोर्टल पर फोटो-वीडियो सहित अपलोड कराने पर भी निगरानी रहेगी

बच्चों की पढ़ाई भी परखी जाएगी
निरीक्षण में यह भी देखा जाएगा कि स्कूल में सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ बच्चों के सीखने का वास्तविक स्तर क्या है। जिला प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली ऐसी समस्याएं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है, उन्हें लंबित नहीं रखा जाए। संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर मौके पर ही समाधान कराने का प्रयास किया जाए।

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