राहुल याद रखें, आजादी के लिए नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेल : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
प्रयागराज में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण कर मुख्यमंत्री योगी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री योगी बोले- मसुरियादीन ने नौ वर्ष जेल में रहकर लड़ी आजादी की लड़ाई, इतिहास ने भुला दिया उनका योगदान
महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं, वंचितों और दलितों के लिए संघर्ष करने वालों को भी मिलना चाहिए सम्मान
नेहरू के साथ 1952 में संसद पहुंचे थे मसुरियादीन, चार बार बने सांसद, जरायम पेशा कानून के खिलाफ उठाई आवाज
मसुरियादीन के नाम पर होगा प्रयागराज का चौराहा और एक प्रमुख संस्था, मुख्यमंत्री ने महापौर से मांगा प्रस्ताव
प्रयागराज
स्वतंत्रता संग्राम में योगदान और महापुरुषों के सम्मान के मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी जी, एक बात नोट करना। जेल में देश की आजादी के लिए केवल और केवल नेहरू जी नहीं गए थे, देश की आजादी के लिए महाशय मसुरियादीन पासी जी भी जेल गए थे।' मुख्यमंत्री ने कहा कि मसुरियादीन ने एक-दो महीने या चार-छह महीने नहीं, बल्कि 1932 से 1944 के बीच नौ वर्ष जेल में रहकर आजादी की लड़ाई लड़ी। इतिहास के कालचक्र में उनके जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी को विस्मृत कर दिया गया। विरासत और विकास में विश्वास करने वाली भाजपा की डबल इंजन सरकार अपने महापुरुषों को भुला नहीं सकती। उन्होंने कहा कि महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं है। जिन्होंने वंचितों और दलितों को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष किया, उन्हें भी उनका उचित सम्मान मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी तेलियरगंज स्थित महाशय मसुरियादीन स्मारक इंटर कॉलेज और टीवी कॉलोनी चौराहे के पास में महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महाशय मसुरियादीन पासी की प्रतिमा के अनावरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पुष्पांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि दो अक्टूबर 1911 को जन्मे मसुरियादीन की जयंती महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के दिन ही पड़ती है। इसके बावजूद उनके योगदान को इतिहास में भुला दिया गया। आज उनकी भव्य प्रतिमा की स्थापना कर सरकार ने उनकी स्मृतियों को जीवंत बनाने का कार्य किया है।
नेहरू के साथ संसद पहुंचे, फिर भी भुला दिए गए मसुरियादीन
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि महाशय मसुरियादीन ने अपना जीवन देश की स्वतंत्रता और समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। अपने लगभग 66-67 वर्ष के जीवन में उन्होंने नौ वर्ष जेल में बिताए। जेल से बाहर रहकर भी स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जनजागरण करते रहे। जनता के बीच उनके प्रति सम्मान का परिणाम था कि वर्ष 1946 में वह उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य बने। स्वतंत्र भारत में वर्ष 1952 से 1972 के बीच चार बार लोकसभा के लिए चुने गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 में एक ही सीट से दो सांसद चुने जाते थे। उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू और महाशय मसुरियादीन पासी एक साथ चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में ऐसे अनेक महापुरुषों ने योगदान दिया, जिनकी स्मृतियों को सम्मान मिलना चाहिए।
जरायम पेशा कानून के खिलाफ आंबेडकर और मसुरियादीन ने लड़ी लड़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों को चुनौती देने वाली कई जातियों को अपमानित करने के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने 1871 में जरायम पेशा कानून बनाया था। पासी समाज सहित कई जातियों को इसकी श्रेणी में रखा गया। वर्ष 1952 में संसद पहुंचने के बाद महाशय मसुरियादीन ने इस कानून के खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और महाशय मसुरियादीन पासी ने इस काले कानून को समाप्त कराने की लड़ाई लड़ी। इस संघर्ष से पासी, सोनकर और अन्य वंचित समाजों को सम्मानजनक जीवन जीने तथा राष्ट्र की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे महापुरुषों का योगदान आने वाली पीढ़ियों को बताया जाना चाहिए।
महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश और समाज के लिए जीवन समर्पित करने वाले हर महापुरुष को सम्मान मिलना चाहिए। यह सम्मान किसी एक परिवार तक सीमित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने वंचितों और दलितों की आवाज उठाई, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष किया, उनकी स्मृतियों को जीवंत रखना आवश्यक है। महापुरुषों को सम्मान देकर ही समाज आगे बढ़ सकता है। अतीत को सम्मान देने से वर्तमान संवरेगा और वर्तमान संवरेगा तो भविष्य भी उज्ज्वल होगा।
मुख्यमंत्री ने महाशय मसुरियादीन की पुत्री कमला कुमारी और पौत्र सचिन कुमार को आश्वस्त किया कि उनके सम्मान पर किसी प्रकार की आंच नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महाशय मसुरियादीन का सम्मान भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का सम्मान है।
मसुरियादीन के नाम पर होगा चौराहा, संस्था को भी मिलेगी पहचान
मुख्यमंत्री योगी ने महाशय मसुरियादीन की स्मृतियों को स्थायी बनाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने महापौर से कहा कि जिस चौराहे पर उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है, उसका नाम महाशय मसुरियादीन पासी के नाम पर रखने का प्रस्ताव भेजें। प्रयागराज की किसी एक प्रमुख संस्था का नाम भी उनके नाम पर रखा जाएगा। उस संस्था में उनकी भव्य प्रतिमा भी स्थापित होगी, ताकि वर्तमान और भावी पीढ़ियां उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।
महाराजा बिजली पासी के किले का पुनरुद्धार करा रही सरकार
मुख्यमंत्री ने पासी समाज के शौर्य और पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराजा बिजली पासी ने 12वीं शताब्दी में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में 12 गढ़ बनवाए थे। विदेशी आक्रांताओं से मुकाबले के लिए इन किलों का निर्माण कराया गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में महाराजा बिजली पासी की प्रतिमा स्थापित कराई थी। अब डबल इंजन सरकार उनके लखनऊ स्थित किले का पुनरुद्धार करा रही है और इसके लिए धन उपलब्ध कराया गया है।
मुख्यमंत्री ने मक्का पासी और वीरांगना ऊदा देवी के बलिदान को भी याद किया। कहा कि मक्का पासी के बलिदान के बाद उनकी पत्नी ऊदा देवी ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा संभाला और लड़ते हुए बलिदान हो गईं। लखनऊ में गठित होने वाली महिला पीएसी बटालियन का नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर रखा जा रहा है। उनकी भव्य अश्वारोही प्रतिमा भी स्थापित की जा रही है।
गरीबों और महापुरुषों के सम्मान के लिए समर्पित है डबल इंजन सरकार : केशव मौर्य
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महाशय मसुरियादीन पासी महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने चार बार लोकसभा में इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और गरीब से गरीब व्यक्ति की बात सुनकर उसकी समस्याओं के समाधान का प्रयास किया। ऐसे महान व्यक्तित्व की प्रतिमा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अनावरण किया जाना उनके योगदान के प्रति सम्मान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार गरीबों के लिए समर्पित है। डबल इंजन सरकार महापुरुषों को आदर और सम्मान देने का काम कर रही है।
जरायम पेशा कानून समाप्त कराने में मसुरियादीन का अहम योगदान : सचिन कुमार
महाशय मसुरियादीन स्मारक समिति के मंत्री एवं उनके पौत्र सचिन कुमार ने कहा कि अंग्रेजी शासन में दलित जातियों को जरायम पेशा घोषित कर उनका उत्पीड़न किया गया था। इस कानून को समाप्त कराने में महाशय मसुरियादीन का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों को सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री योगी के प्रयासों की सराहना की।
समारोह में कार्यक्रम के आयोजकों ने मुख्यमंत्री को हनुमान जी की प्रतिमा भेंटकर स्वागत किया गया। सचिन कुमार ने उन्हें भगवान बुद्ध की प्रतिमा और पुष्पगुच्छ भेंट किए।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
समारोह में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सांसद प्रवीण पटेल, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, गुरु प्रसाद मौर्य, दीपक पटेल, पीयूष रंजन निषाद, वाचस्पति पासी, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, सुरेंद्र चौधरी, महापौर गणेश केसरवानी, भाजपा गंगापार जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान सहित अन्य जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और महाशय मसुरियादीन पासी के परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
राहुल याद रखें, आजादी के लिए नेहरू ही नहीं, मसुरियादीन पासी भी गए थे जेल : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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