पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू, शादियों समेत मांगलिक कार्यों पर रोक

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पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू, शादियों समेत मांगलिक कार्यों पर रोक
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 हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला है, क्योंकि इस वर्ष अधिकमास का आगमन हो रहा है। अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। चंद्रमा और सूर्य के कैलेंडर के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जोड़ा जाता है।

यह 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस बार इसकी खास बात यह है कि यह ज्येष्ठ महीने में पड़ रहा है, जिसके कारण दो ज्येष्ठ मास देखने को मिलेंगे। पंडित अभिषेक शर्मा के अनुसार, इसका सीधा प्रभाव हिंदू त्योहारों की तिथियों पर पड़ेगा। सामान्यतः हर वर्ष त्योहार लगभग 11 दिन पहले आ जाते हैं, क्योंकि चंद्र वर्ष, सौर वर्ष से छोटा होता है।

नवंबर में आएंगे बड़े पर्व
लेकिन जब अधिकमास जुड़ता है, तो यह अंतर संतुलित हो जाता है और त्योहार लगभग 18 से 20 दिन आगे खिसक जाते हैं। यही कारण है कि 2026 में अधिकमास के कारण त्योहारों की तिथियां सामान्य से काफी देर से आएंगी।

इस परिवर्तन का प्रभाव यह होगा कि कई बड़े पर्व, जो आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में आते हैं, वे इस बार अक्टूबर के अंत या नवंबर में मनाए जाएंगे। धार्मिक दृष्टि से अधिकमास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान दान, जप, तप और पूजा का विशेष महत्व होता है। इसलिए 2026 का यह समय न केवल खगोलीय दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा।

हर तीसरे वर्ष जोड़ा जाता है एक महीना
पंडित तुषार कौशिक ने सौर और चंद्र गणना के बीच के अंतर को समझाते हुए अधिकमास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सौर वर्ष 365 दिन और लगभग 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष केवल 354 दिनों का होता है। इस कारण दोनों वर्षों के बीच हर साल करीब 11 दिनों का अंतर आ जाता है।

यह अंतर तीन सालों में बढ़कर लगभग 33 दिन का हो जाता है। इस असंतुलन को संतुलित करने के लिए हिंदू पंचांग में हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीने जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह विशेष महीना भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व है।

हालांकि अधिकमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस अवधि में भक्तजन पूजा-पाठ, व्रत, कथा, दान-पुण्य और भक्ति में लीन रहते हैं। उन्होंने बताया कि 17 मई से 15 जून तक शहर में शादियों रुक जाएगी। अधिकमास में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश ओर जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।

इस साल इस तिथि पर पड़ रहे हैं त्योहार
    : रक्षाबंधन 28 अगस्त
    : कृष्ण जनमाष्टमी 4 सितंबर
    : गणेश चतुर्थी 14 सितंबर
    : श्राद्ध पक्ष शुरुआत 26 सितंबर
    : शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर
    : दशहरा 20 अक्टूबर
    : करवाचौथ 29 अक्टूबर
    : धनतेरस 6 नवंबर
    : दीपावली 8 नवंबर
    : गाेवर्धन पूजा 10 नवंबर
    : भैया दूज 11 नवंबर
    : छठ पूजा 15 नवंबर

 

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