‘पंजाब का सच दबाया जा रहा’, ‘सतलुज’ फिल्म हटाने पर AAP नेता का केंद्र सरकार पर हमला

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चंडीगढ़.

ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 से फिल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर आम आदमी पार्टी के नेता नील गर्ग ने केंद्र सरकार पर कड़ा निशाना साधा है। बठिंडा में मीडिया से बात करते हुए नील गर्ग ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और फिल्म को तुरंत रिलीज करने की मांग की।

नील गर्ग ने कहा, "जब 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी फिल्मों को प्रमोट किया जाता है, तो सरकारें पंजाब के सच को दबाने की कोशिश क्यों करती हैं?" उन्होंने आगे कहा कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष पर बनी फिल्म 'सतलुज' में 1980 और 1990 के दशक में कांग्रेस सरकार के दौरान पंजाब के युवाओं पर हुए अत्याचारों को दिखाया गया है। ऐसी फिल्मों पर रोक लगाना और उन्हें दबाना इस बात का सबूत है कि सरकार अपने ही इतिहास से डरती है। आप नेता ने केंद्र और कांग्रेस के बीच मिलीभगत की आशंका जताते हुए सवाल किया, "उस समय कांग्रेस सत्ता में थी; तो फिर केंद्र सरकार इससे क्यों डर रही है? क्या दोनों के बीच कोई मिलीभगत है? इस फिल्म पर रोक लगाकर आखिर क्या छिपाया जा रहा है?"

नील गर्ग ने मांग ने क्या मांग की?
नील गर्ग ने मांग की है कि इस फिल्म को रिलीज किया जाना चाहिए ताकि अतीत पर रोशनी डाली जा सके और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके। फिल्म अभिनेता और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज की काफी चर्चा हो रही है। कानूनी और सर्टिफिकेशन से जुड़ी कई मुश्किलों के बाद 3 जुलाई को आखिरकार जी5 ने पहले इस फिल्म को ओटीटी पर रिलीज किया और अब हटा दिया है। यह फिल्म 2022 में बनकर तैयार हो गई थी लेकिन लंबे समय तक सर्टिफिकेशन के पचड़े में फंसी रही। इसी वजह से 2023 में ये टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में तय प्रीमियर में शामिल नहीं हो पाई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है जो इतने फसाद में फंसी हुई है

किस पर आधारित है यह फिल्म?
दिलजीत की सतलुज मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी और पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर आधारित है। जसवंत सिंह खालरा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में लापता हुए हजारों अज्ञात लोगों और उनके कथित अंतिम संस्कार के मामले की जांच की थी। उनकी इस जांच ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ला खड़ा किया था। इस मुद्दे को उठाने के बाद जसवंत सिंह खुद लापता हो गए।

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