पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, 201 सेमग्रस्त गांवों में किसानों को धान की अग्रिम बिजाई की मिली छूट

Editor
5 Min Read
पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, 201 सेमग्रस्त गांवों में किसानों को धान की अग्रिम बिजाई की मिली छूट
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

 कलानौर
 पंजाब सरकार ने सेमग्रस्त घोषित किए राज्य के 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। इनमें गुरदासपुर जिले के तीन गांव शामिल हैं, जिनके करीब 200 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। पंजाब सरकार ने यह छूट दो साल के लिए दी है। गौर हो कि पंजाब में किसान दस मई से पहले धान की पनीरी की बिजाई नहीं कर सकते हैं। इसका उद्देश्य राज्य में घटते भू-जल स्तर को रोकना है।

निकटवर्ती निज्जरपुर गांव के सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि ब्लाक डेरा बाबा नानक से संबंधित सरपंचों की मांग पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब भर में सेमग्रस्त घोषित किए 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। अब इन खेतों के किसान साल भर में कभी भी धान की बिजाई कर सकते हैं।

इस फैसले से डेरा बाबा नानक ब्लाक के सेमग्रस्त गांवों के सरपंचों व किसानों में खुशी की लहर है। इस संबंध में गांव निज्जरपुर के सरपंच रणदीप सिंह, प्रकाश सिंह, कुलविंदर सिंह, कर्मजीत सिंह, जगजीत सिंह आदि ने बताया कि पिछले साल अगस्त में सक्की किरण नाले और रावी दरिया के पानी से आई बाढ़ में उनकी धान की फसल तबाह हो गई थी।

इसके बाद विभिन्न संगठनों के सहयोग से उन्होंने गेहूं की बिजाई की, लेकिन गेहूं वाले खेतों में सेम आ जाने के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई थी। सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव अठवाल, कोटली सूरत मल्ली, अर्लीभन्न के रकबे में सेम पड़ जाने और गेहूं की फसल नष्ट होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन सेम प्रभावित खेतों में अग्रिम धान लगाने की मांग की थी।

इस मांग के मद्देनजर पंजाब सरकार ने कृषि विभाग और विभिन्न टीमों को सेमग्रस्त खेतों की जांच के लिए भेजा था। टीमों ने जांच के बाद पाया कि इन खेतों में डेढ़ से दो फुट मिट्टी खोदने के बाद सेम का पानी आ जाता है।

पंजाब सरकार ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए जिला गुरदासपुर के गांव भुल्लर, अठवाल, कोटली सूरत मल्ली के अलावा पूरे पंजाब के विभिन्न जिलों के कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया है। इनमें श्री मुक्तसर साहिब के 95, फरीदकोट के 19, फाजिल्का के 81, बठिंडा के दो और मानसा के एक गांव शामिल हैं।

सरकार ने इन गांवों के क्षेत्र को धारा 3(3)(सी) के तहत 'पंजाब प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सायल वाटर एक्ट, 2009' के दायरे से अगले दो सालों की अवधि के लिए छूट दे दी है। इस छूट के बाद अब ये किसान निर्धारित तिथि से पहले अग्रिम धान की बिजाई कर सकेंगे। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी आर्थिक को काफी राहत मिलेगी।

सरपंच रणदीप सिंह ने सेमग्रस्त जमीनों के मालिक किसानों से अपील की कि वे धान की बिजाई के लिए नर्सरियों की तैयारी करें ताकि सेमग्रस्त खेतों में धान की बिजाई की जा सके। सरपंच रणजीत सिंह और प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल अगस्त महीने में बाढ़ के पानी से जहां उनकी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहीं देर से खेतों में किसानों द्वारा बिजाई की गई गेहूं की फसल भी खेतों में सेम की मार पड़ जाने के कारण नष्ट हो गई है।

उन्होंने बताया कि कई किसानों के खेतों में से डेढ़ से तीन क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार ही निकली है, जो सामान्य से काफी कम है। किसानों ने कहा कि पंजाब सरकार को सेमग्रस्त जमीनों पर खराब हुई गेहूं की फसल का भी किसानों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए ताकि समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे किसानों की आर्थिक सहायता हो सके।

जिला गुरदासपुर के कृषि अधिकारी डा. ठाकुर रणधीर सिंह से बातचीत में उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा जिला गुरदासपुर के तीन गांवों आदि सहित कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया गया है।

इसके तहत इन सेमग्रस्त गांवों के किसानों को अग्रिम धान बिजाई की छूट मिली है, जबकि दूसरी जमीनों में धान की पनीरी की बिजाई और धान की रोपाई पंजाब सरकार के खेतीबाड़ी विभाग के आदेशों पर होगी।

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *