एमएलसी चुनाव से पहले बिहार की सियासत में हलचल, 9 सीटों पर कड़ा मुकाबला

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एमएलसी चुनाव से पहले बिहार की सियासत में हलचल, 9 सीटों पर कड़ा मुकाबला
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पटना

राज्य में होने वाले 9 विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) के चुनाव में क्या महागठबंधन तोड़फोड़ के जरिए नया गुल खिलाएगा? क्या कुछ समीकरण ऐसा बनेगा जिसके सहारे महागठबंधन के विधायक राजद के दो एमएलसी की पारी खत्म होने के बरक्स दो एमएलसी की सीटें हासिल कर सकें? क्या कुछ गणित बनने की संभावना है? क्या विपक्ष के बचे 16 विधायक अपने वोट का बलिदान करेंगे या फिर समीकरण की जद में कोई खेल रच पाएंगे? ऐसे कई सवाल एमएलसी की 9 सीटों के लिए होने वाले चुनाव के संदर्भ में उठने लगे हैं।

राजद के लिए खोने का चुनाव !
जून 2026 में होने वाले बिहार विधान परिषद के आगामी चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल के मौजूदा 2 एमएलसी मोहम्मद फारुक और सुनील कुमार सिंह का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। 9 सीटों के होने वाले चुनाव के संदर्भ में माना जा रहा है कि एक सीट के लिए 25 विधायक की जरूरत होगी। वैसे में राजद के हिस्से में केवल एक सीट बचाने की क्षमता है। ऐसा इसलिए कि राजद के पास एक्यूरेट 25 विधायक हैं। लेकिन इन 25 विधायकों के अलावा विपक्ष के 16 विधायक शेष रह जाएंगे। अब सवाल उठता है कि राजद का हाल कहीं राज्यसभा चुनाव वाला न हो जाए? 41 विधायकों के रहते राजद के एडी सिंह चुनाव हार गए और एनडीए राज्यसभा की सभी पांचों सीटें जीत गई।

एनडीए के निशाने पर 9 MLC सीटें?
तोड़फोड़ के जरिए जीत के आदी हो चुके एनडीए के रणनीतिकार क्या कुछ राज्यसभा वाला गेम खेलने की रणनीति पर काम कर रहे हैं? वैसे अभी तक के गणित के अनुसार एनडीए आठ सीटों पर जीत के प्रति आश्वस्त है। एनडीए सूत्रों के अनुसार विधायकों की संख्या के अनुरूप वह विधान परिषद की रिक्त हो रही आठ सीटों का हकदार है। एक एमएलसी के लिए लगभग 25 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी। इस जोड़ से 8 एमएलसी की सीटें जीतने के लिए 200 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। एनडीए के पास फिर भी 2 शेष रह जाएंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीन-तीन एमएलसी सीटें जदयू और बीजेपी के हिस्से आएंगी। एक सीट लोजपा और एक सीट रालोमो के हिस्से में जाने की बात कही जा रही है।

क्या 9 वीं सीट को लेकर मचेगा धमाल?
राज्यसभा चुनाव में सेंधमारी करने में सफल एनडीए के रणनीतिकार क्या कोई गुल खिला सकते हैं। राजद की बात करें तो राज्यसभा चुनाव में एक विधायक बागी हो गए थे। कांग्रेस के तीन विधायकों ने भी अलग राह पकड़ी थी। क्या एआईएमआईएम के 5, कांग्रेस के छह, वाम दल के तीन बसपा के एक और आईपी गुप्ता कुल 16 विधायकों की भूमिका में कुछ उलट पुलट की संभावना है? या एनडीए किसी धनपशु के बहाने 9 वीं सीट के लिए कोई बाजी खेल जाए? क्या राजद को समर्थन देने वाले एआईएमआईएम को वादे के अनुसार एमएलसी की एक सीट देगी या फिर दूसरी सीट का गणित उलझाने के लिए एआईएमआईएम कोई उम्मीदवार खड़ा करेगा? ऐसे कई अनुत्तरित सवाल हैं। राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं कब कौन किसका साथ दे, कौन साथ छोड़ दे, कोई नहीं कह सकता है!

 

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