बरगी क्रूज हादसे में नया खुलासा, चश्मदीद ने सौंपी पेन ड्राइव-वीडियो; एम्बुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल

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बरगी क्रूज हादसे में नया खुलासा, चश्मदीद ने सौंपी पेन ड्राइव-वीडियो; एम्बुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल
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जबलपुर.

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और बचाव कार्य में शामिल रहे बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के समक्ष कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंची 108 एम्बुलेंस में चालक के अलावा कोई मेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था, जिसके कारण घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार नहीं मिल सका।

इस संबंध में उन्होंने वीडियो, पेन ड्राइव और 14 बिंदुओं पर आधारित विस्तृत शिकायत न्यायिक जांच आयोग को सौंपी है। नीरज मिश्रा ने न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी को सौंपे गए दस्तावेजों में कहा है कि क्रूज डूबने के बाद कई लोगों को स्थानीय लोगों ने पानी से बाहर निकाला था। इनमें कुछ लोग जीवित थे और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी। आरोप है कि मौके पर पहुंची एम्बुलेंस में न तो कोई अटेंडर मौजूद था और न ही कोई प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ, जिससे शुरुआती उपचार नहीं मिल पाया। उन्होंने आयोग को एक वीडियो भी सौंपा है, जिसमें कथित रूप से एम्बुलेंस चालक यह स्वीकार करता दिखाई दे रहा है कि वह अकेले मौके पर पहुंचा था।

राहत और बचाव कार्य पर उठे सवाल
शिकायत में दावा किया गया है कि हादसे के बाद प्रशासनिक प्रतिक्रिया अपेक्षित स्तर की नहीं थी। नीरज मिश्रा के अनुसार शाम 5:30 बजे से 6:15 बजे के बीच हुई घटना के बाद भी राहत और बचाव दल समय पर सक्रिय नहीं हो सके। SDRF और अन्य आपदा प्रबंधन संसाधनों के देर से पहुंचने के कारण बचाव अभियान प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मोटर बोट, प्रशिक्षित गोताखोर और आपदा राहत दल तत्काल सक्रिय हो जाते, तो जनहानि को कम किया जा सकता था।

बीमा और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल
शिकायत में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार क्रूज और यात्रियों के लिए बीमा व्यवस्था होना आवश्यक है। आरोप है कि दुर्घटनाग्रस्त क्रूज और उसमें सवार पर्यटकों का कोई बीमा नहीं था, जबकि यात्रियों से टिकट शुल्क लिया गया था। इसके अलावा लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, आपातकालीन संचार व्यवस्था और मौसम संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन को लेकर भी जांच की मांग की गई है।

13 लोगों की गई थी जान
गौरतलब है कि 30 अप्रैल की शाम बरगी बांध के बैकवॉटर क्षेत्र में 41 लोगों को लेकर निकला क्रूज पानी में डूब गया था। इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था।

60 दिन में देनी है रिपोर्ट
राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच समिति पर्यटन विभाग के अधिकारियों, रिसॉर्ट प्रबंधन और क्रूज चालक के बयान दर्ज कर चुकी है। आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। अब प्रत्यक्षदर्शी द्वारा प्रस्तुत नए साक्ष्यों और शिकायतों के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। हादसे की वास्तविक वजह, सुरक्षा मानकों की स्थिति और प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर आयोग की रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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