टूटी झुग्गियों पर नया विवाद: शासकीय कर्मचारियों ने भी आवास के लिए किया दावा

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भोपाल.

भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित तुलसी मानस भवन, हिंदी भवन और गांधी भवन के बीच की जमीन पर बनी 27 झुग्गियों को हाल ही में प्रशासन ने हटाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के बाद यहां रह रहे परिवारों को मालीखेड़ी स्थित प्रधानमंत्री आवासों में पुनर्वासित किया गया है।

प्रशासन का दावा है कि पूरी प्रक्रिया सर्वे और दस्तावेजों के आधार पर की गई, लेकिन अब इस मामले ने नया मोड़ ले लिया है। झुग्गियों के हटने के बाद कुछ ऐसे लोग भी सामने आए हैं, जो दावा कर रहे हैं कि वहां उनकी झुग्गी थी। इनमें एक शासकीय कर्मचारी और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं, जिससे पूरे मामले की जांच और जटिल हो गई है।

दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों ने कार्रवाई के दौरान सामान के गायब होने और नुकसान के आरोप लगाए हैं। प्रशासन इन आरोपों से इनकार कर रहा है और कह रहा है कि पूरी प्रक्रिया रहवासियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। अब प्रशासन द्वारा प्राप्त दावों और शिकायतों की जांच की जा रही है, जिसके बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सर्वे के आधार पर किया गया पुनर्वास
प्रशासन के अनुसार कार्रवाई से पहले आदिवासी बस्ती का विस्तृत सर्वे किया गया था। इस दौरान 27 परिवारों के नाम और दस्तावेज एकत्र कर सूची तैयार की गई, जिसके आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास आवंटित किए गए। अधिकारियों का कहना है कि केवल पात्र परिवारों को ही पुनर्वास का लाभ दिया है।

फर्जी दावों से बढ़ी उलझन
झुग्गियां हटने के बाद दो नए दावेदार सामने आए हैं। इनमें से एक सेवानिवृत्त मंत्रालय कर्मचारी महेश सोंधिया और दूसरे वन विभाग में पदस्थ मनीष जायसवाल हैं। दोनों ने अलग-अलग झुग्गियों पर अपना दावा किया है, जबकि सर्वे में इन स्थानों पर अन्य लोगों के नाम दर्ज थे। एसडीएम ने दोनों से निवास के प्रमाण मांगे हैं।

प्रभावित परिवारों के गंभीर आरोप
करीब 20 प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई के दौरान उनका कीमती सामान गायब हो गया या नष्ट हो गया। कुछ लोगों का कहना है कि उनके घरों की अलमारियां, जेवर, नकदी और जरूरी दस्तावेज नहीं मिले। कार्रवाई के बाद वे अपने पुराने स्थान पर जाकर सामान ढूंढना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से प्रवेश रोक दिया है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा के लिए पक्की दीवार और बैरिकेडिंग कर दी है। पालीटेक्निक चौराहे से सीएम हाउस जाने वाले मार्ग पर 20 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात हैं, ताकि कोई अवांछित गतिविधि न हो सके।

प्रशासन का पक्ष
एसडीएम दीपक पांडे ने स्पष्ट किया है कि झुग्गियों को हटाने से पहले सभी रहवासियों की मौजूदगी में उनका सामान सुरक्षित रूप से शिफ्ट कराया गया था। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का सामान मलबे में नहीं दबा और पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई।

10 से अधिक आवेदन पहुंचे
सूत्रों के अनुसार, अब तक 10 से अधिक आवेदन एसडीएम कार्यालय में प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें लोग झुग्गी पर अपना दावा कर रहे हैं। प्रशासन इन सभी मामलों की जांच कर रहा है और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

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