नेपाल के विदेश मंत्री बोले भारत आर्थिक शक्ति, सीमा विवाद बातचीत से सुलझेगा

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नई दिल्ली
सीमा विवाद को लेकर नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की टिप्पणी के बाद अब नेपाल नरम पड़ता दिख रहा है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की ताकत का लोहा मानते हुए कहा कि भारत एक बड़ी तकनीकी और आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत के साथ सौहार्दपूर्ण बातचीत के जरिए ही सीमा विवाद का हल चाहता है।

भारत दौरे पर आए खनाल ने कहा, जब हम सीमा की ओर देखते हैं तो भारत एक आर्थिक महाशक्ति के तौर पर नजर आता है। उन्होंने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर खुद को साबित किया है और अर्थव्यवस्था के मामले में मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि नेपाल की नई सरकार भारत को किसी भी मायने में विरोधी के तौर पर नहीं देखती है।

भारत से चाहते हैं अच्छे संबंध
खनाल ने कहा कि हम अब अतीत के मामलों के साथ बंधे नहीं रहना चाहते हैं बल्कि भारत के साथ परस्पर लाभकारी संबंध चाहते हैं। उन्होंने कहा, हम भारत के साथ सीमा मुद्दे को 'खुले मन' से और द्विपक्षीय ढांचे के आधार पर हल करना चाहते है। हम 21वीं सदी की भू-राजनीति के विकृत, अति संवेदनशील नजरिए से भारत को नहीं देखते। बता दें कि खनाल और विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच एक दिन पहले ही बातचीत हुई है।

खनाल भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए हैं। खनाल ने कहा कि जब हम खुले मन से साथ बैठेंगे तो सब साफ हो जाएगा और कोई भी मुद्दा इतना जटिल नहींहै कि जिसका हल ना निकल सके। उन्होंने कहा कि आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर सारी बातचीत होगी तो हल भी निकल आएगा।

लिपुलेख को लेकर विवाद
जयशंकर के साथ बैठक के दौरान खनाल ने कहा कि नेपाल भारत के साथ अपने संबंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार नयी दिल्ली के साथ ठोस और सार्थ रूप से जुड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था, 'भारत और नेपाल के बीच एक विशेष संबंध है, जो सीमा पार संपर्क और साझा सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं की मजबूत नींव पर आधारित है।' बालेंद्र शाह ने 31 मई को कहा था कि भारत के साथ लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर चर्चा के अलावा, काठमांडू चीन और ब्रिटेन के साथ भी संपर्क में है। मामला लिपुलेख का है। नेपाल इस इलाके पर दावा करता है और अपने मैप में भी दिखा चुका है। वहीं आजादी से पहले के समझौते के मुताबिक ही भारत का इस क्षेत्र पर कब्जा है। मानसरोवर-कैलास यात्रा के लिए भी लिपुलेख बहुत महत्वपूर्ण है।

भारत ने हालांकि नेपाल के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे के सभी पहलुओं से निपटने के लिए एक स्थापित द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है।

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