राजगढ़ के लाल मोहन नागर को आज मिलेगा पद्मश्री, जल-पर्यावरण क्रांति के लिए राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

Editor
2 Min Read

राजगढ़
मध्य प्रदेश के लिए कल का दिन बेहद गौरवशाली होने जा रहा है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को मंगलवार 23 जून 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाजा जाएगा। आदिवासी अंचल में शिक्षा, ग्राम विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अद्वितीय कार्यों के लिए देश के सर्वोच्च मंच से उनकी इस साधना को सम्मानित किया जा रहा है।

जब सब कुछ छोड़ आदिवासियों के बीच पहुंचे मोहन नागर
बता दें कि 23 फरवरी 1968 को राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। छात्र जीवन से ही समाज सेवा की लौ जल रही थी, इसलिए साल 1991 में वे अपना सब कुछ छोड़कर आदिवासी कल्याण के संकल्प के साथ बैतूल जिले के सुदूर इलाकों में आ गए।

बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि पर्याप्त बारिश के बावजूद जल संचयन के अभाव में सर्दियों की शुरुआत में ही कुएं-बावड़ी सूख जाते हैं। इस पानी की किल्लत की वजह से स्थानीय आदिवासियों को भारी पलायन करना पड़ता था, जिसे रोकने के लिए मोहन नागर ने जल-संरक्षण को अपना जीवन बना लिया।

श्रमदान से खड़ी कीं 75 हजार जल संरचनाएं
मोहन नागर ने बहते पानी को रोकने के लिए एक बेहद सस्ता और पारंपरिक लोक-फॉर्मूला अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सीमेंट की खाली बोरियों में रेत और मिट्टी भरकर नदी-नालों पर 'बोरी बंधान' की शुरुआत की।

सतपुड़ा की पहाड़ियों पर भगीरथ प्रयास
'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व जनभागीदारी (श्रमदान) का उदाहरण पेश करते हुए सतपुड़ा पारिस्थितिकी क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर रिकॉर्ड 75,000 जल संरचनाओं का निर्माण कराया और हजारों पौधों का रोपण किया, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल कई फीट ऊपर आ गया।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube Reporters Support Directors Live