शुभेंदु अधिकारी के निशाने पर ममता की एक और पहचान! कोलकाता स्टेडियम के बाहर तोड़ी गई फुटबॉल मूर्ति

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शुभेंदु अधिकारी के निशाने पर ममता की एक और पहचान! कोलकाता स्टेडियम के बाहर तोड़ी गई फुटबॉल मूर्ति
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कलकत्ता

ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर सरकार बनाने वाले सीएम शुभेंदु सरकार लगातार बड़े फैसले ले रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल में शनिवार को ममता के कार्यकाल में बने एक स्टैच्यू को हटा दिया गया। यह स्टेच्यू साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर बनाया गया था। यह फैसला, पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निसीथ प्रमाणिक के बयान के बाद आया है। इस बयान में निशीथ ने स्टेडियम में सुविधाओं को बढ़ाने का ऐलान किया था।

खेल मंत्री ने क्या कहा था
इस दौरान प्रमाणिक ने इस स्टैच्यू की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि यह स्टैच्यू दिखने में अच्छा नहीं है। यह बहुत बदसूरत है। कमर के नीचे के दो पैर और उनके ऊपर रखा हुआ फुटबॉल अजीब सा लगता है। शुभेंदु सरकार में खेल मंत्री ने कहाकि यह देखने में भी बिल्कुल भी आकर्षक नहीं लगती, इसलिए हम इस तरह की बेतुकी और अर्थहीन बनावट को यहां नहीं रखेंगे और इसे हटा दिया जाएगा। प्रमाणिक ने कहाकि जब से यह मूर्ति लगी है, पिछली सरकार के बुरे दिन शुरू हो गए । इसके बाद मेस्सी विवाद हुआ और सरकार की सत्ता भी चली गई।

राजनीतिक बयान भी आए सामने
इस मामले पर राजनीतिक बयान भी सामने आए हैं. बीजेपी नेता कीया घोष ने सोशल मीडिया पर लिखा कि स्टेडियम के सामने लगी यह संरचना अब तोड़ दी गई है, जैसा पहले कहा गया था. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई है. दरअसल, कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी इस प्रतिमा को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि यह संरचना स्टेडियम की सुंदरता के अनुरूप नहीं है और इसे हटाने की जरूरत है. साथ ही उन्होंने स्टेडियम के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की बात भी कही थी। 

साल्ट लेक स्टेडियम देश के प्रमुख फुटबॉल मैदानों में से एक है, जहां ईस्ट बंगाल और मोहन बागान जैसे बड़े मुकाबले होते रहे हैं. पिछले साल यहां फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी के कार्यक्रम के दौरान भी भारी भीड़ देखने को मिली थी. यह प्रतिमा साल 2017 में FIFA U-17 वर्ल्ड कप से पहले लगाई गई थी. इसे लेकर शुरुआत से ही अलग-अलग राय बनी हुई थी. कुछ लोग इसे स्टेडियम की पहचान मानते थे, जबकि कुछ इसे असामान्य और विवादित बताते थे. अब इसके तोड़े जाने के बाद कोलकाता में एक बार फिर राजनीतिक और खेल दोनों ही स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। 

साल 2017 में हुआ तैयार
आखिर शनिवार को, स्टेडियम के पास होने वाले बदलाव के तहत इस स्टैच्यू को हटा दिया गया। साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर यह स्टैच्यू साल 2017 में बनाया गया था। उस साल अंडर-17 फीफा विश्वकप से पहले इसे वीवीआईपी गेट के पास लगाया गया था। इस मूर्ति में फुटबॉल खेलने वाले विशाल पैर दिखाए गए हैं, जो ‘विश्व बांग्ला’ लोगो में विलीन होते हुए प्रतीत होते हैं और फुटबॉल पर ‘जयी’ शब्द अंकित है।

खेलमंत्री के कई ऐलान
इसके अलावा खेल मंत्री प्रमाणिक ने विवेकानंद युवा भारती क्रीडांगन के आसपास फूड कोर्ट बनाने से लेकर बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने का भी ऐलान किया। खेलमंत्री ने यह भी कहाकि लियोनेल मेस्सी के दौरे को लेकर हुए विवाद की फिर से जांच की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जायेगा कि टिकट धारकों को पैसे वापिस मिलें।

गौरलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी को हराकर सरकार बनाई है। शुभेंदु सरकार यहां पर भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने हैं।

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