भोजशाला विवाद पर मप्र हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को माना मंदिर; मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने के निर्देश

Editor
4 Min Read
भोजशाला विवाद पर मप्र हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, परिसर को माना मंदिर; मुस्लिम पक्ष को अलग जमीन देने के निर्देश
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

धार.

मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मामले में जज ने फैसला पढ़ते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर माना है। कोर्ट के फैसले में परिसर को मां वाग्देवी के मंदिर के रूप में माना गया है। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को अलग से जमीन दी जाएगी।

फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ी
फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर हैं। मामले पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए। मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला। भोजशाला का फैसला हिंदू पक्ष में आते ही इंदौर के हाईकोर्ट गेट 3 के सामने समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

कड़ी सुरक्षा में हुई नमाज
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच में नमाज हुई। शांतिपूर्ण तरीके से नमाज हो चुकी है और अधिकांश मुस्लिम अपने इलाकों में पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने बीती रात से ही अधिक मात्रा में पुलिस बल बुला लिया था। दूसरी ओर अब भोजशाला के बाहर ज्योति मंदिर पर बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग एकत्रित हो रहे हैं।

युगल पीठ ने सुरक्षित रख लिया था फैसला
इससे पहले छह अप्रैल से चली नियमित सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति आलोक कुमार अवस्थी और न्यायमूर्ति वीके शुक्ला की युगल पीठ ने बीती 12 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ ही अरशद वारसी और शोभा मेनन ने पक्ष रखा था। मंदिर पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन और मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे।

फैसले से पहले आइसक्रीम पार्टी आयोजित
महत्वपूर्ण फैसला आने से ठीक पहले हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा एक आइसक्रीम पार्टी आयोजित की गई है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट में हर साल ग्रीष्म अवकाश शुरू होने के ठीक पहले अंतिम कार्य दिवस पर अभिभाषक संघ द्वारा आइसक्रीम पार्टी आयोजित की जाती है। हाई कोर्ट और जिला कोर्ट में ग्रीष्म अवकाश शनिवार से शुरू हो रहे हैं, जो लगभग एक माह के होंगे। अवकाश में आपराधिक और अर्जेंट मामलों की सुनवाई हो सकेगी।

क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता था। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा था कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।

चार साल से चल रही थी सुनवाई
दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले में पिछले चार वर्षों से सुनवाई चल रही थी।

TAGGED: ,
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *