यूपी में आम की खेती में बड़ा बदलाव, छोटे पेड़ों और सघन बागवानी पर जोर

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश में आम की गुणवत्ता बढ़ाने और कम लागत में अधिक फल लेने के लिए रणनीति बन रही है। बागवानों को छोटे कद वाले आमों की फसल लगाने को प्रेरित किया जाएगा। पुराने पेड़ों की छंटाई होगी, जिससे आंधी-बारिश में नुकसान कम होगा। जुलाई से प्रशिक्षण अभियान चलेगा।

प्रदेश में करीब 3.25 लाख हेक्टेयर में आम के बाग हैं। ज्यादातर बागवान पेड़ों की छंटाई नहीं करते, जिससे वे 20 से 30 फीट ऊंचे हो जाते हैं। ऐसे पेड़ों पर फल की देखरेख और दवा छिड़काव में अधिक खर्च आता है। उद्यान विभाग के सर्वे में सामने आया कि 10 से 15 साल बाद ये पेड़ कम फल देते हैं।

आम बागवानी प्रबंधन पर चलेगा प्रशिक्षण अभियान
इस वर्ष 50 फीसदी से ज्यादा फसल आंधी-तूफान से प्रभावित हुई है। अब बागवानी विकास मिशन में छोटे कद वाले पेड़ों पर जोर दिया जाएगा। सघन बागवानी से आम के बाग में दूसरी फसलें भी ली जा सकेंगी। प्रशिक्षण अभियान लखनऊ के मलिहाबाद स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र से शुरू होकर सभी 13 आम पट्टियों में चलेगा।

बौनी किस्मों की जुटा रहे जानकारी
उद्यान विभाग बौनी किस्मों की जानकारी जुटा रहा है। आम्रपाली, पूसा अरुणिमा, मल्लिका, अरुणा, पूसा प्रतिभा और अवध समृद्धि को बौनी किस्में माना जाता है। सघन बागवानी में इन्हीं किस्मों के पौधे बागवानों को दिए जा रहे हैं। विभाग ने केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान सहित अन्य संस्थानों से भी जानकारी मांगी है। नई किस्मों को प्रशिक्षण केंद्रों में लगाकर उनके फायदे देखे जाएंगे। सफल होने पर उनके पौधे किसानों को बांटे जाएंगे।

18 की जगह 30 मीट्रिक टन उत्पादन
औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र के मुख्य विशेषज्ञ कृष्ण मोहन चौधरी ने बताया कि फल न देने वाली डालों को काटकर जड़ में वर्मी कंपोस्ट डालते हैं। इससे पुराने बागों का जीर्णोद्धार होता है। कटाई सितंबर से फरवरी तक होती है; जड़ में चूना लगाने से तना छेदक कीड़े नहीं लगते।

कटे हुए पेड़ में कल्ले निकलते हैं और पौधे को छतरी का आकार दिया जाता है। शोध में पहले एक हेक्टेयर में 18 मीट्रिक टन पैदावार होती थी, जो कटाई के बाद 25 से 30 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। इस विधि का प्रशिक्षण जुलाई से अगस्त तक दिया जाएगा।

मशीनीकरण और निर्यात को बढ़ावा
उद्यान विभाग आम के पेड़ों की कटाई-छंटाई के लिए मशीन भी उपलब्ध करा रहा है। कृषि विभाग इस मशीन पर 50 फीसदी अनुदान देगा। यह मशीन किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिये संचालित होगी। इससे बागवान किराये पर कटाई-छंटाई करा सकेंगे

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में 7 मई को आयोजित फ्रूट होराइजन 2026 में निर्यात योग्य फलों पर जोर दिया गया। उद्यान विशेषज्ञों ने छोटे पेड़ों को बढ़ावा देने की सलाह दी, जिससे देखभाल आसान होगी और कम लागत में अधिक मुनाफा मिलेगा।

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