चंडीगढ़
पंजाब के लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त आदेश जारी कर पंजाब सरकार को 15 दिन में 8 लाख कर्मचारियों-पेंशनरों का DA जारी करने के लिए कहा हैं। इसके साथ ही कहा गया है कि अगर इस महीने के अंत कर कर्मचारियों-पेंशनरों का DA जारी नहीं होता तो 6 प्रतिशत ब्याज देना होगा।
बता दें कि पंजाब सरकार की महंगाई भत्ते को लेकर दायर याचिका को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पिछले फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही साफ आदेश दिए हैं कि 15 दिन के अंदर कर्मचारियों का बकाया DA दिया जाए। सरकारी कर्मचारियों के वकील के मुताबिक हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब पंजाब सरकार के पास 15 दिन का समय है, इस दौरान उसे कर्मचारियों को DA की बकाया रकम जारी करनी होगी।
कर्मचारी वर्ष 2023 से महंगाई भत्ते के भुगतान में देरी से परेशान हैं। कोर्ट की ओर से विस्तृत लिखित आदेश का अभी इंतजार है। सरकार पूरे मामले में लगातार DA भुगतान का विरोध करती रही। ऐसे में अब संभावना है कि वह हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
सरकार की दलीलें कोर्ट ने खारिज कीं सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने अदालत में कहा कि उसने 18 जून 2021 की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है। सरकार ने यह भी बताया कि 18 फरवरी 2025 के तहत एक नई योजना (प्लान) पेश की गई है। राज्य सरकार का यह भी तर्क था कि पंजाब अपने कर्मचारियों को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक वेतनमान (हाई पे मास्टर) देता है, इसलिए अलग से DA देने की आवश्यकता नहीं है।
कर्मचारी संगठनों की ओर से पेश एडवोकेट सन्नी सिंगला ने दलील दी कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार के पैटर्न के अनुसार महंगाई भत्ता देने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि IAS, IPS, IFS और न्यायिक अधिकारियों को केंद्र के अनुरूप DA दिया जा रहा है, जबकि अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों को इससे वंचित रखा गया है।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हरियाणा के कर्मचारी और पेंशनर भी अधिक वेतन प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन हमारे सामने विवाद वेतन का नहीं, बल्कि महंगाई भत्ते के भुगतान का है।
2016 से रुका DA भी जारी करने के निर्देश एडवोकेट सन्नी सिंगला के मुताबिक अदालत ने 1 जनवरी 2016 से लंबित DA जारी करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव को आदेश दिया गया है कि वे निर्धारित समय में आदेश को लागू करने (कॉम्प्लायंस) की रिपोर्ट हाईकोर्ट रजिस्ट्री में दाखिल करें। अदालत ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह अनावश्यक अतिरिक्त वित्तीय खर्च न करे।
सिंगल बेंच के फैसले को सही ठहराया डिवीजन बेंच ने 8 अप्रैल 2026 को आए सिंगल बेंच के फैसले को सही माना। कर्मचारी पक्ष के वकील सन्नी सिंगला के अनुसार इस फैसले का लाभ चपरासी से लेकर IPS अधिकारियों तक सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगा। इससे कई कर्मचारियों के वेतन में हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं लंबित DA और एरियर का कुल बकाया करीब 14 हजार करोड़ रुपए आंका गया है।
केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी फिलहाल पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता दे रही है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में 18 प्रतिशत DA अभी भी लंबित है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस अंतर को समाप्त करने और बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला कर्मचारी संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि महंगाई भत्ता कोई बोनस या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन का अभिन्न हिस्सा है। इसी आधार पर कर्मचारियों ने लंबित DA और एरियर जारी करने की मांग की।
ऐसे शुरू हुआ पूरा मामला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि केंद्र सरकार के समान DA बढ़ोतरी का लाभ IAS, IPS, IFS और न्यायिक अधिकारियों को दिया जा रहा है, लेकिन अन्य कर्मचारियों और पेंशनरों को नहीं। उनकी मांग थी कि 18 प्रतिशत लंबित DA और उसका एरियर जारी किया जाए।
