योगी सरकार का बड़ा कदम, हर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष

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लखनऊ

योगी सरकार ने प्रदेश में उच्च शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर महत्वपूर्ण पहल की है। विद्यार्थियों को स्वस्थ, सुरक्षित और तनावमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक समान छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति तैयार की जाएगी। इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर उच्च स्तरीय बैठक की।

बैठक में प्रस्तावित नीति के विभिन्न पहलुओं, संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं के विस्तार और विद्यार्थियों को समय पर परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा एम.पी. अग्रवाल, विशेष सचिव निधि वास्तव समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

तनाव और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने पर फोकस

योगी सरकार उच्च शिक्षा को केवल डिग्री और रोजगार तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास पर जोर दे रही है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक माहौल तैयार करना है, जहां पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर को लेकर तनाव अथवा भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे विद्यार्थियों को समय रहते उचित सहायता मिल सके। नीति के तहत राज्य से लेकर जिला और संस्थान स्तर तक मानसिक स्वास्थ्य सहायता की समन्वित व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार काउंसलिंग और विशेषज्ञ सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

राज्य स्तर पर नोडल व्यवस्था, जिलों में होगी निगरानी

प्रस्तावित व्यवस्था में निदेशक, उच्च शिक्षा को राज्य स्तर पर नोडल एवं कार्यान्वयन प्राधिकारी बनाया जाएगा। वहीं प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में संचालन समिति नीति के क्रियान्वयन, बजट और नियमित समीक्षा की निगरानी करेगी। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। यह समिति जिले के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ समन्वय करते हुए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करेगी।

हर संस्थान में बनेगा मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष

योगी सरकार की प्रस्तावित नीति का सबसे अहम पहलू प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता कक्ष की स्थापना है। यहां विद्यार्थियों को सुरक्षित और गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा अन्य विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही ऑनलाइन मानसिक स्वास्थ्य पोर्टल विकसित कर विद्यार्थियों के लिए प्रारंभिक टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है।

शिक्षकों और कर्मचारियों को भी दिया जाएगा प्रशिक्षण

विद्यार्थियों की मानसिक परेशानियों को शुरुआती स्तर पर पहचानने के लिए शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्र प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में तनाव, भावनात्मक परेशानी और अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संकेतों को समझने तथा जरूरतमंद विद्यार्थियों तक सहायता पहुंचाने की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षित शिक्षक छोटे समूहों में विद्यार्थियों के साथ मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जीवन कौशल से जुड़े संवाद कार्यक्रम भी आयोजित करेंगे। गंभीर तनाव या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए हेल्पलाइन और रेफरल व्यवस्था विकसित की जाएगी। पूरी प्रक्रिया में विद्यार्थी की गोपनीयता और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी नीति से जोड़ा जाएगा

प्रस्तावित नीति में मानसिक स्वास्थ्य को केवल काउंसलिंग तक सीमित न रखते हुए इसे विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ने की योजना है। इसके लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं, खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और करियर काउंसलिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। सोशल मीडिया के माध्यम से भी सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संदेश और जागरूकता सामग्री विद्यार्थियों तक पहुंचाई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना है।

पोर्टल और डैशबोर्ड से होगी निगरानी

नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी के लिए उच्च शिक्षा विभाग में समेकित पोर्टल एवं डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से संस्थानों में संचालित मानसिक स्वास्थ्य गतिविधियों, सहायता व्यवस्था और प्रगति की निगरानी की जा सकेगी। योगी सरकार की इस पहल से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए एक ऐसा संस्थागत तंत्र विकसित होने की उम्मीद है, जहां पढ़ाई के साथ उनकी मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को भी प्राथमिकता मिले। सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को अधिक विद्यार्थी केंद्रित, संवेदनशील, सुरक्षित और समावेशी बनाना है।

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