हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑपरेशन पवन घायल सैनिक को वॉर इंजरी पेंशन का अधिकार

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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: ऑपरेशन पवन घायल सैनिक को वॉर इंजरी पेंशन का अधिकार
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चंडीगढ़
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में तैनात एक सैनिक को बड़ी राहत देते हुए सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सैनिक को सामान्य विकलांगता पेंशन के बजाय वॉर इंजरी पेंशन देने और उसकी 50 प्रतिशत विकलांगता को 75 प्रतिशत मानकर पेंशन का लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऑपरेशनल एरिया में आतंकवादियों की तलाश के दौरान लगी चोट को सैन्य सेवा से असंबद्ध नहीं माना जा सकता।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ केंद्र सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र सरकार ने एएफटी के 29 मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी।

मामला भारतीय सेना की पैरा रेजीमेंट में तैनात रहे नायक नाहर सिंह से जुड़ा है जो ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के हिस्से के रूप में तैनात थे।केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सैनिक की बाईं आंख में लगी चोट पेड़ों की झाड़ियों और शाखाओं के टकराने से हुई थी।

सरकार का तर्क था कि सैनिक को डयूटी के दौरान अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी, इसलिए इस चोट को युद्धजनित या सैन्य सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी चोट नहीं माना जा सकता।

हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एक ऐसे सैनिक की चोट को सैन्य सेवा से जोड़ने से इंकार कर रही है, जो ऑपरेशनल एरिया के जंगलों में आतंकवादियों की तलाश कर रहा था।

अदालत ने कहा कि सैनिक को “परफोरेटिंग इंजरी लेफ्ट आई” नामक गंभीर चोट उसी दौरान लगी, जब वह सरकार के आदेश पर ऑपरेशन पवन के तहत सैन्य दायित्व निभा रहा था।

ऐसे में यह चोट न केवल सैन्य सेवा से संबंधित है, बल्कि वास्तविक सैन्य कर्तव्य के निर्वहन के दौरान हुई है।खंडपीठ ने केंद्र सरकार की 31 जनवरी 2001 की नीति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष सैन्य अभियानों के दौरान होने वाली मृत्यु या विकलांगता श्रेणी-ई के अंतर्गत आती है और ऐसे मामलों में वॉर इंजरी पेंशन देय होती है।

कोर्ट ने एएफटी के फैसले को सही ठहराया
ऑपरेशन पवन इसी श्रेणी में शामिल है।अदालत ने विकलांगता के प्रतिशत को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत मानने के एएफटी के फैसले को भी सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि नाहर सिंह भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ थे और सेवा के दौरान ही उन्हें यह विकलांगता हुई, इसलिए वॉर इंजरी पेंशन तथा 75 प्रतिशत विकलांगता के आधार पर लाभ देने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।

 

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