लाड़की बहन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 16 हजार पुरुष उठा रहे थे लाभ

Editor
3 Min Read
लाड़की बहन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 16 हजार पुरुष उठा रहे थे लाभ
WhatsApp Share on WhatsApp
add_action('wp_footer', 'jazzbaat_new_version_modal'); function jazzbaat_new_version_modal() { ?>
SW24news • Beta

मुंबई 

महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहन योजना’ की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं. दस्तावेजों की जांच और ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद सरकार ने करीब 80 लाख लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया है. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हजारों पुरुष महिलाओं के नाम पर इस योजना का लाभ उठा रहे थे। 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि योजना शुरू करते समय पात्रता के लिए कुछ शर्तें तय की गई थीं, लेकिन शुरुआती चरण में स्व-प्रमाणन (Self Certification) के आधार पर आवेदन स्वीकार किए गए थे. बाद में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर सवाल उठाए, जिसके बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच और केवाईसी अभियान शुरू किया। 

जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सरकार की तरफ से कराए गए विभिन्न सरकारी डेटाबेस के मिलान के बाद कई तरह की गड़बड़ियां सामने आईं. जांच में पता चला कि करीब 16 हजार पुरुषों ने खुद को महिला बताकर योजना का लाभ लिया. इसके अलावा लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता और 4 से 5 लाख ऐसे लाभार्थी पाए गए जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन मौजूद है, जबकि योजना के नियमों के तहत वे पात्र नहीं थे। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 74 हजार ऐसी महिलाएं भी पाई गईं, जिनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी, जबकि करीब 2 लाख महिलाओं की उम्र 65 वर्ष से अधिक निकली. दोनों ही श्रेणियां योजना की पात्रता शर्तों से बाहर हैं। 

ई-केवाईसी नहीं कराने वालों पर भी कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि करीब 62 लाख लाभार्थियों ने बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद ई-केवाईसी नहीं कराया. सरकार ने ई-केवाईसी की समय-सीमा तीन बार बढ़ाई थी और करीब पांच महीने तक लोगों को दस्तावेज सत्यापन का अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। 

सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी पहचान सत्यापन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी खातों, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना है। 

अब भी 1.60 करोड़ महिलाओं को मिल रहा लाभ
उधर मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अपात्र लाभार्थियों को हटाने के बावजूद योजना का लाभ अभी भी करीब 1.60 करोड़ पात्र महिलाओं को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना को पारदर्शी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं तक ही पहुंचे। 

राज्य सरकार का दावा है कि इस कार्रवाई से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सकेगा. वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है कि शुरुआती चरण में इतनी बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के आवेदन कैसे स्वीकृत हो गए। 

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *