मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, पेंशन योजनाओं से हटा इंदिरा गांधी का नाम

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नई दिल्ली

 केंद्र सरकार ने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों, विशेषकर दिव्यांगजनों को बड़ी राहत दी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 'राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम' (NSAP) को साल 2030-31 तक यानी अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है।इस फैसले से देश के करीब 3.20 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा। इसके साथ ही दिव्यांग पेंशन के नियमों को आसान बनाते हुए पेंशन की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।

अब 40% दिव्यांगता पर जन्म से ही मिलेगी पेंशन
दिव्यांगजनों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि अब 40 प्रतिशत की दिव्यांगता वाले लोग जन्म से ही पेंशन के हकदार माने जाएंगे। इससे पहले पेंशन का लाभ लेने के लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 वर्ष और दिव्यांगता का प्रतिशत 80 होना अनिवार्य था। नियमों में इस ढील से बड़ी संख्या में दिव्यांगों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा।

पेंशन की रकम में हुआ इजाफा
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नियमों को उदार बनाने के साथ ही सरकार ने पेंशन की राशि भी बढ़ा दी है। अब 0 से 79 वर्ष के आयु वर्ग के दिव्यांगों को 300 रुपये के बजाय 375 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। वहीं, 80 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों की पेंशन 500 रुपये से बढ़ाकर 625 रुपये कर दी गई है। यह राशि केंद्र सरकार का हिस्सा है; राज्य सरकारें इसमें अपनी तरफ से अलग-अलग राशि जोड़कर लाभार्थियों को भुगतान करती हैं।

योजनाओं के नाम से हटा 'इंदिरा गांधी'
    कैबिनेट ने योजनाओं के नामकरण में भी अहम बदलाव किए हैं। अब इस पूरे कार्यक्रम को 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' कहा जाएगा। इसके तहत चलने वाली तीन प्रमुख योजनाओं दिव्यांग, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन से 'इंदिरा गांधी' का नाम हटाकर अब उनके आगे 'प्रधानमंत्री' शब्द जोड़ दिया गया है।

सरकार इन योजनाओं पर अगले पांच सालों में कुल 53,428 करोड़ रुपये खर्च करेगी। हालांकि, वृद्धावस्था, विधवा और पारिवारिक लाभ योजनाओं की बुनियादी शर्तों में कोई और बदलाव नहीं किया गया है।

11.40 लाख रेलकर्मियों को भी त्योहारी तोहफा
कैबिनेट बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए भी खजाना खोला गया है। दुर्गा पूजा और दशहरे से पहले रेलवे के 11,40,770 गैर-राजपत्रित (नॉन-गजटेड) कर्मचारियों को 78 दिनों का उत्पादकता आधारित बोनस (PLB) देने का फैसला लिया गया है। प्रति पात्र कर्मचारी बोनस की अधिकतम सीमा 17,951 रुपये तय की गई है। इस फैसले से सरकारी कोष पर 2,009.61 करोड़ रुपये का भार आएगा।

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