हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, मंडियों में 30 जून तक होगी सूरजमुखी की पूरी खरीद

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चंडीगढ़.

हरियाणा में सूरजमुखी बीज की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को लेकर दायर जनहित याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकार के आश्वासन के बाद सुनवाई समाप्त कर दी।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां अदालत में दिए गए अपने बयान से बंधी रहेंगी।

सरकार ने अदालत को बताया कि 23 जून 2026 की शाम 5:25 बजे तक मंडियों में पहुंचे सूरजमुखी बीज की पूरी खरीद कर ली गई है और यदि कोई किसान 30 जून तक अपनी उपज लेकर आता है तो उसकी खरीद भी निर्धारित मानकों के अनुसार एमएसपी पर की जाएगी। जस्टिस विकास बहल और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में मांग की गई थी कि सभी किसानों की सूरजमुखी फसल का लाइसेंस धारी आढ़तियों के माध्यम से एमएसपी पर तत्काल खरीद सुनिश्चित की जाए।

साथ ही एमएसपी पर खरीद से इन्कार करने वाले आढ़तियों के खिलाफ कार्रवाई तथा खरीद अवधि बढ़ाने के भी निर्देश दिए जाएं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (एचएसडब्ल्यूसी) तथा हैफेड की ओर से अदालत को बताया गया कि 23 जून तक मंडियों में आई सूरजमुखी की पूरी आवक खरीद ली गई है। दोनों सरकारी एजेंसियों ने कुल 93,505 क्विंटल सूरजमुखी बीज की खरीद की है। सरकार ने यह भी आश्वस्त किया कि 30 जून तक यदि कोई किसान अपनी उपज बेचने के लिए संबंधित समिति के पास पहुंचता है तो उसकी फसल भी एमएसपी पर खरीदी जाएगी।

याचिकाकर्ताओं के वकील प्रदीप रापडिया ने कोर्ट में कहा कि सरकार के इस बयान के बाद कहा कि अब याचिका का उद्देश्य पूरा हो चुका है और इसे निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने आग्रह किया कि अदालत सरकार को उसके बयान से बाध्य करे ताकि किसानों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए निस्तारित कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी अदालत में दिए गए अपने बयान का पूरी तरह पालन करेंगे।

गौरतलब है कि इस मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार द्वारा आढ़तियों के लिए एमएसपी का केवल एक प्रतिशत कमीशन तय किए जाने के विरोध में कुछ कच्चे आढ़ती 2.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे थे, जिससे किसानों की फसल की खरीद प्रभावित हो रही थी। इसी विवाद को लेकर किसानों के हित में यह जनहित याचिका दायर की गई थी।

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