पंजाब में खाने-पीने की चीजों पर बड़ा सवाल! हर सातवां सैंपल फेल, मिलावटखोरों का जाल बेनकाब

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पंजाब में खाने-पीने की चीजों पर बड़ा सवाल! हर सातवां सैंपल फेल, मिलावटखोरों का जाल बेनकाब
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चंडीगढ़ 

पंजाब में खाद्य पदार्थों में बड़े स्तर पर मिलावट का खेल चल रहा है और हर सात में एक एक सैंपल फेल हो रहा है। मिलावटखोर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। डेयरी उत्पादों में अधिक मिलावट हो रही है और यहां तक कि केमिकल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। 

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ साल से खाद्य पदार्थों में मिलावट बढ़ती जा रही है। वर्ष 2025-26 के दौरान खाद्य पदार्थों के 6054 सैंपल लिए गए जिसमें से 852 हो गए। सरकार अलग-अलग खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी का पता लगाने के लिए सैंपल ले रही है। साथ ही मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई भी कर रही है बावजूद इसके इस पर रोक नहीं लग पा रही है।

वर्ष 2024-2025 के दौरान विभाग की तरफ से 4131 सैंपल लिए गए जिसमें से 748 खाने योग्य नहीं पाए गए। इसी तरह 2023-2024 के दौरान 6041 सैंपल जांच के लिए भेज गए जिसमें से 929 मानकों पर खरे नहीं उतरे। वर्ष 2022-2023 के दौरान 8179 सैंपल लिए गए और इस दौरान 1724 सैंपलों में मिलावट सामने आई जबकि वर्ष 2021-2022 में 6768 सैंपलों की जांच की गई और 1059 में मिलावट सामने आई है।

केंद्र सरकार का सभी राज्यों में सैंपलिंग बढ़ाने पर जोर है ताकि मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। दूध, पनीर, घी, मिठाई, मसाले, तेल, बिस्कुट, नमकीन समेत अन्य खाद्य पदार्थों में अधिक मिलावट हो रही है। पंजाब में दूसरे राज्यों से तैयार घटिया पनीर व अन्य पदार्थों की आपूर्ति हो रही है जिन्हें बनाने में केमिकल तक का इस्तेमाल होता जो सेहत के लिए खतरनाक है। यह कैंसर को न्योता दे रहा है।

हरियाणा में भी चल रहा मिलावट का खेल
हरियाणा में भी बड़े स्तर पर मिलावट का खेल चल रहा है और राज्य में वर्ष 2025-26 के दौरान खाद्य पदार्थों के 900 सैंपल लिए गए जिनमें से 34% यानी 309 फेल हो गए। इसी तरह वर्ष 2024-2025 में 2233 सैंपल लिए गए जिनमें से सैंपल फेल पाए गए। वहीं वर्ष 2023-2024 के दौरान 3485 में से 856 और 2022-2023 में 4445 में से 1425 और वर्ष 2021-2022 के दौरान 4235 में से 1182 सैंपल फेल पाए गए हैं।

नियमित से की जा रही जांच
एफएसएसएआई के क्षेत्रीय कार्यालय और राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की टीमें मिलावट का पता लगाने के लिए भी नियमित रूप से निगरानी, निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के नमूने लेती हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत अथॉरिटी की तरफ से कार्रवाई की जाती है जिसमें जुर्माना लगाना और लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है। विभाग की तरफ से फूड सेफ्टी ऑन व्हील पर नियमित रूप से जांच की जा रही है। इन टेस्टिंग वैन में दूध, पनीर, पानी और अन्य रोजाना के प्रयोग वाले खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने की सुविधा है।

विशेष अभियान चला रही सरकार
स्वास्थ्य डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि खाद्य पदार्थों की जांच के लिए सरकार विशेष अभियान चला रही है। पिछले महीने दो दिन विशेष अभियान चलाकर पूरे राज्य की स्थानीय डेयरियों की जांच की गई, जिसके दौरान शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरियों, प्रोसेसिंग यूनिटों और खुदरा दुकानों से पनीर के 211 सैंपल लिए गए हैं। इसके अलावा दूध के भी कुल 204 सैंपल एकत्र किए गए थे, जिनमें से 68 सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए।

 

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